
अस्सी फीसदी बर्फ से ढंके ग्रीनलैंड में कैसे काम करती है सेना, क्यों कुत्तों की एक टुकड़ी मानी जाती है सबसे अहम और खतरनाक?
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डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.
ग्रीनलैंड अभी खासा चर्चा में है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उसे पाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए है. पुचकारने से लेकर धमकाने तक के दांव खेले जा रहे हैं. इस बीच इस द्वीपीय देश की फौज पर भी बात हो रही है. ग्रीनलैंड चूंकि सेमी-ऑटोनॉमस देश है, जो डेनमार्क के अधीन है, लिहाजा उसे बचाने का जिम्मा भी डेनिश सेना के पास है. ये सेना भारी बर्फबारी और आबादीशून्य इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग करती है.
बर्फीले हिस्से में किसी भी विदेशी हलचल पर नजर रखने के लिए डॉग पेट्रोल है. इस टुकड़ी को सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल भी कहते हैं. सिरियस एक लैटिन शब्द है, जिसका मतलब है चमकता हुआ या अलर्ट. सैनिकों और कुत्तों की टीम तूफानी इलाकों में पूरी सावधानी से घूमती रहती है.
क्यों पड़ी इस तरह की फौज की जरूरत
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप देश है. भारत के मुकाबले देखें तो यह देश के करीब दो तिहाई आकार का है. इतने बड़े आकार के बावजूद यहां की आबादी पचपन हजार से कुछ ही ज्यादा है. इसकी वजह ये है कि देश का 80 फीसदी हिस्सा मोटी बर्फ से ढंका हुआ है. यह भी मामूली बर्फ नहीं कि सही जा सके. बर्फ की चादरें कई किलोमीटर मोटी होती हैं. महीनों तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी कम होता है. ऐसे में सैन्य उपकरणों और वाहन नहीं पहुंच सकते. और पहुंच भी जाएं तो गश्त तो नहीं ही हो सकती क्योंकि न तो वहां सड़कें हैं, न ही पुल. लेकिन सुरक्षा तो जरूरी है. तो इसका एक तरीका खोजा गया- डॉग स्लेज.
सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल दुनिया की सबसे अनोखी और एलीट मिलिट्री यूनिट्स में गिनी जाती है, जो ग्रीनलैंड के उत्तर पूर्वी हिस्से की जमी हुई जमीन पर तैनात रहती है. ये वो इलाका है, जिसे दुनिया के सबसे ठंडे, सुनसान और दुर्गम क्षेत्रों में रखा जाता है.
डेनमार्क सरकार ने स्लेज पेट्रोल यूनिट को साल 1950 में बनाया था. यह दस्ता किसी भी विदेशी गतिविधि, अवैध घुसपैठ, चुपचाप हो रहे रिसर्च मिशन या संदिग्ध मूवमेंट पर नजर रखता है. खास बात यह है कि यहां आधुनिक टैंक या बख्तरबंद गाड़ियां नहीं चल सकतीं, इसलिए गश्त आज भी पुराने तरीके से होती है.

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