
Myth vs Science: सूर्य ग्रहण से जुड़े छह बड़े अंदेशे और उनका वैज्ञानिक जवाब
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सूर्य ग्रहण को लेकर भारत में तरह-तरह की भ्रांतियां और भविष्यवाणियां फैल रही हैं. कहीं कहा जा रहा है कि ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए, तो कहीं दावा किया जा रहा है कि गर्भवती महिलाएं अगर इस दौरान बाहर निकलेंगी तो बच्चे को नुकसान होगा. आइये इसे विज्ञान की कसौटी पर देखते हैं इसमें कितनी सच्चाई है.
Surya Grahan 2025: 21 सितंबर यानी आज साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा. यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ढक लेगा. इस दौरान सूर्य अर्धचंद्राकार आकार में दिखाई देगा.
भारत में यह ग्रहण नजर नहीं आएगा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा. भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत रात 11 बजे होगी, इसका पीक टाइम 1 बजकर 11 मिनट पर होगा और समापन 22 सितंबर की रात 3 बजकर 23 मिनट पर होगा.
धर्म, ज्योतिष को मानने वाले ग्रहण को लेकर आगाह करते हैं. कहीं कहा जा रहा है कि ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए, तो कहीं दावा किया जा रहा है कि गर्भवती महिलाएं अगर इस दौरान बाहर निकलेंगी तो बच्चे को नुकसान होगा. लेकिन वैज्ञानिक इसे नहीं मानते .आइये जानते हैं इस पर विज्ञान क्या कहता है.
मिथक 1: गर्भवती महिला पर ग्रहण का असर सबसे बड़ा डर यही फैलाया जाता है कि अगर गर्भवती महिला चंद्रग्रहण के दौरान बाहर निकले तो बच्चे के शरीर पर दाग या जन्मजात निशान हो जाते हैं.
विज्ञान क्या कहता है? वैज्ञानिक शोध और मेडिकल स्टडीज साफ बताते हैं कि इसका कोई आधार नहीं है. बच्चे की शारीरिक बनावट और त्वचा की विशेषताएं डीएनए, जेनेटिक फैक्टर, मां के स्वास्थ्य और गर्भावस्था के दौरान पोषण पर निर्भर करती हैं, न कि ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं पर. अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि ग्रहण के दौरान बाहर निकलने से भ्रूण पर कोई नकारात्मक असर पड़ता है.
मिथक 2: ग्रहण में खाना जहरीला हो जाता है अक्सर कहा जाता है कि चंद्रग्रहण या सूर्यग्रहण के समय बनाया या रखा हुआ खाना ज़हरीला हो जाता है और इसे खाना नुकसानदायक है.

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