
Explained: कभी पार्टी में फूंकी 'जान', अब हुए अनजान! राघव चड्ढा, संजय जोशी, आजम खान... साइडलाइन नेताओं की लंबी है लिस्ट
ABP News
Political Leaders Sideline: 1 अप्रैल से पहले राघव चड्ढा आप के बड़े नेता थे, लेकिन अगले दिन ही साइडलाइन कर दिए गए. ऐसे नेताओं की लंबी लिस्ट है, जिनके नाम से पार्टी की पहचान बनी, अब वही गुमनाम हैं.
भारतीय राजनीति में कुछ नेता अपनी पार्टी के पर्याय बन जाते हैं. उनकी आवाज पार्टी की आवाज हो जाती है, उनके नाम से पार्टी की पहचान होती है, लेकिन सत्ता का खेल कातिलनुमा होता है. एक दिन अचानक उन्हें किनारे कर दिया जाता है. ये कहानियां सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि गठबंधन, परिवार, गुटबाजी और 'नए चेहरों' की भूख की कहानियां हैं. राघव चड्ढा, आरसीपी सिंह हों या संजय जोशी.. ये नेता भी कभी पार्टी के 'अनमोल रत्न' थे. एक्सप्लेनर में समझते हैं कि कैसे यह 'पुराना सामान' बन गए...
राघव चड्ढा- AAP: दिल्ली मॉडल का चेहरा, 2026 में अचानक हटा दिया गया
राघव चड्ढा AAP के सबसे चमकदार चेहरों में से एक थे. 2022 में वे पंजाब से राज्यसभा सांसद बने, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने, बजट पर तीखे सवाल पूछे और केजरीवाल की 'अरविंद केजरीवाल' इमेज को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया, लेकिन 2 अप्रैल 2026 को AAP ने अचानक चौंकाने वाला फैसला लिया. राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया. उनकी जगह अशोक मित्तल को दे दी. पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर कहा कि अब चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए.
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की हार के बाद चड्ढा चुप हो गए थे. वे केजरीवाल के कार्यक्रमों से दूर रहे, पार्टी की कोर एजेंडा से दूरी बढ़ गई. पार्टी सूत्रों ने इसे 'अनुशासनहीनता' बताया. बीजेपी और कांग्रेस ने इसे 'AAP में दरार' बताया. सिर्फ 24 घंटे पहले तक चड्ढा पार्टी का चेहरा थे, अगले दिन साइडलाइन हो गए.

मध्य प्रदेश विधानसभा में घटती जा रही कांग्रेस विधायकों की संख्या, जीतू पटवारी की बढ़ रहीं मुश्किलें!
मध्य प्रदेश में जून 2026 में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है. इससे पहले कांग्रेस के विधायकों की संख्या कम होती जा रही है. इस मामले ने कांग्रेस और जीतू पटवारी की चिंता बढ़ा दी है.

AAP की मांग के बाद भी राज्यसभा में अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं राघव चड्ढा, उनके पास हैं ये चार ऑप्शन
AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि सांसद राघव चड्ढा को बोलने के लिए पार्टी के कोटे में से समय आवंटित न करें. इसके बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि फिर चड्ढा सदन में कैसे अपनी बात रखेंगे.











