
Exclusive: वैशाखी पर शुरू हुई कहानी! ज्योति मल्होत्रा की तीर्थयात्रा कैसे बन गई भारत की सुरक्षा के लिए खतरा?
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अप्रैल 2024 में 325वें वैसाखी महोत्सव के लिए ज्योति की दूसरी यात्रा ने और भी चिंता पैदा कर दी. वह न केवल पाकिस्तान लौटी, बल्कि 17 अप्रैल से 25 मई तक रुकी. जांच करने वाले अधिकारियों का मानना है कि इस दौरान राजनयिक और डिजिटल चैनलों के ज़रिए संचालित पाकिस्तानी प्रभाव नेटवर्क में उनकी गहरी भागीदारी देखी गई.
सिख धर्म के पवित्र स्थलों की आध्यात्मिक यात्रा की आड़ में एक ट्रैवल व्लॉगिंग के रूप में शुरू हुआ ज्योति मल्होत्रा से जुड़ा केस अब डिजिटल युद्ध और जासूसी के एक बड़े मामले में बदल गया है. ज्योति ने साल 2023 में 324वें वैसाखी महोत्सव के दौरान पहली बार पाकिस्तान की यात्री की थी. अब सीमा पार से इंफ्लुएंस ऑपरेशन में कथित रूप से सहायता करने के लिए ज्योति भारतीय खुफिया एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं.
इंडिया टुडे द्वारा देखे गए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन डॉक्यूमेंट के मुताबिक, धार्मिक यात्रा में ज्योति मल्होत्रा की हरकीरत सिंह ने मदद की थी. हरकीरत सिंह एक प्रमुख समन्वयक है, जो आधिकारिक गलियारे के जरिए सिख जत्थों (तीर्थयात्री समूहों) को पाकिस्तान ले जाने के लिए जाना जाता है. हरकीरत ने कई ऐसी तीर्थयात्राओं का आयोजन किया है, जो अब ज्योति और अन्य को पाकिस्तान के लोगों से मिलवाने के आरोप में जांच के दायरे में है. जब ज्योति 2023 में वैसाखी यात्रा के लिए मंजूरी पाने में फेल रही, तो उसे कथित तौर पर एहसान से मिलवाया गया.
वैसाखी यात्रा और पहला कनेक्शन
हर साल, हजारों सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान के पवित्र स्थलों- ननकाना साहिब, करतारपुर साहिब, पंजा साहिब और लाहौर में गुरुद्वारा डेरा साहिब की यात्रा करते हैं, जो SGPC (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति) और पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के बीच एक व्यवस्था के तहत होता है. ऐसी ही एक यात्रा की तैयारी के दौरान ज्योति की पहली मुलाक़ात एहसान उर्फ़ दानिश से हुई, जो एक पाकिस्तानी उच्चायोग अधिकारी है और जिसे बाद में 13 मई, 2025 को भारत द्वारा अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया गया.
अप्रैल 2024 में 325वें वैसाखी महोत्सव के लिए ज्योति की दूसरी यात्रा ने और भी चिंता पैदा कर दी. वह न केवल पाकिस्तान लौटी, बल्कि 17 अप्रैल से 25 मई तक रुकी. जांचकर्ताओं का मानना है कि इस अवधि में राजनयिक और डिजिटल चैनलों के ज़रिए संचालित पाकिस्तानी प्रभाव नेटवर्क में उनकी गहरी भागीदारी देखी गई.
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