
ब्रिटेन ने एक, जर्मनी ने 13 सैनिक ग्रीनलैंड भेजे... ट्रंप को क्या मेसेज दे रहे ये छह देश, निकल रहे दो मायने
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ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यूरोपीय देशों की यह सीमित सैन्य मौजूदगी सिर्फ अभ्यास भर नहीं है. यह अमेरिका, रूस और चीन तीनों को एक साथ संदेश देने की कोशिश है. सवाल यही है कि इतनी कम संख्या में पहुंचे सैनिक, क्या वाकई आर्कटिक पर छाए संकट के बादल हटा पाएंगे.
ग्रीनलैंड की मदद के लिए आगे आए यूरोपीय देशों के सैनिक धीरे-धीरे वहां पहुंचने लगे हैं. लेकिन ये संख्या वहां पहले से मौजूद अमेरिकी सैनिकों से भी कम है. किसी ने एक, किसी ने दो तो किसी ने 13 सैनिक भेजे हैं.
बता दें कि ये सैनिक ग्रीनलैंड में हो रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास (Operation Arctic Endurance) के लिए पहुंच रहे हैं. इनका मकसद डेनमार्क को सैन्य अभ्यास की तैयारी में मदद करना है. यूरोपीय सेनाओं की सीमित तैनाती से अमेरिका को संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है.
बता दें कि कल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की अमेरिकी मंत्रियों से मीटिंग हुई थी. इसमें गतिरोध पर कोई सफलता नहीं मिली थी. उल्टा उस बैठक के बाद, ट्रंप ने अपने इस दावे को दोहराया कि अगर रूस या चीन कभी भी ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहें तो डेनमार्क अपने स्वायत्त क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम नहीं होगा.
निकल रहे दो संदेश, ट्रंप किसे मानेंगे?
रॉयल डेनिश डिफेंस कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर मार्क जैकबसेन ने कहा कि ग्रीनलैंड में यूरोपीय सैन्य तैनाती ने अमेरिकी प्रशासन को दो संदेश दिए. रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा, 'एक तो रोकना है, यह दिखाना है कि अगर आप सैन्य रूप से कुछ करने का सोचते हैं, तो हम ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए तैयार हैं.'
और दूसरा मेसेज यह है कि, 'ठीक है, हम आपकी चेतावनी (चीन-रूस से खतरे वाली) को गंभीरता से लेते हैं, हम यहां अपनी उपस्थिति बढ़ाते हैं, अपनी संप्रभुता का ध्यान रखते हैं और ग्रीनलैंड पर निगरानी में सुधार करते हैं.'

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