
कागजों पर तालाब, मुर्दों के नाम पर पेमेंट, बिचौलियों की अंधेरगर्दी... मनरेगा पर 5 राज्यों से 'आजतक' की पड़ताल
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उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि योजना का असली लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा. ऐसे में सवाल उठता है कि केंद्र ने नाम बदलकर 'जी राम जी' (G RAM G) तो कर दिया, लेकिन क्या सिर्फ नाम बदलने से लूट का यह पुराना खेल रुक पाएगा?
केंद्र सरकार ने भले ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर 'विकसित भारत-जी राम जी' (VB- G RAM G) कर दिया हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी भ्रष्टाचार के पुराने दलदल में धंसी हुई है. आजतक की पांच राज्यों में की गई एक्सक्लूसिव पड़ताल ने मनरेगा के उस कमजोर और खामियों से भरे सिस्टम को उजागर किया है, जहां मुर्दे मजदूरी कर रहे हैं, तालाब सिर्फ फाइलों में खोदे जा रहे हैं और बिचौलिये मजदूरों के पसीने की कमाई पर दावत उड़ा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि योजना का असली लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा. इस योजना को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि MGNREGA का नाम बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के कारण बदला गया. उन्होंने मजदूरों की जगह मशीनों का इस्तेमाल, मजदूरों की जगह ठेकेदारों का इस्तेमाल, बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए अनुमान, एक ही काम को बार-बार करना और नकली जॉब कार्ड जैसी गड़बड़ियों का ज़िक्र किया और कहा कि MGNREGA के तहत करप्शन खत्म कर दिया गया है.
ऐसे में सवाल उठता है कि केंद्र ने नाम बदलकर 'जी राम जी' (G RAM G) तो कर दिया, लेकिन क्या सिर्फ नाम बदलने से लूट का यह पुराना खेल रुक पाएगा? क्योंकि आजतक की विशेष पड़ताल में सरकारी तिजोरी में सेंधमारी और गरीबों के हक पर डकैती का एक ऐसा डरावना सच सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है. जिसे रोजगार की 'गारंटी' कहा गया, वह भ्रष्टाचार की 'गारंटी' बन गई है.
मंत्रालय के हालिया एक ऑडिट ने भी मनरेगा में भारी अनियमितताओं को चिन्हित किया था. रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के मात्र 8 महीनों (अप्रैल 2025 से नवंबर 2025) में 302 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी पाई गई थी. इसके बाद भी पांच राज्यों में की गई पड़ताल में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है.
उत्तर प्रदेश: महाराजगंज में कागजों में काम, मौके पर सन्नाटा
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