
असम पुलिस बनाम सिंगापुर पुलिस... कोरोनर्स कोर्ट की रिपोर्ट से उठा बड़ा सवाल- जुबिन गर्ग की मौत हादसा थी या साजिश?
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सिंगापुर कोरोनर्स कोर्ट ने जुबिन गर्ग की मौत को हादसा बताया, जबकि असम पुलिस ने इसे साजिशन हत्या करार दिया है. पोस्टमार्टम, विसरा रिपोर्ट, शराब, लाइफ जैकेट और चार्जशीट के विरोधाभासों के बीच एक सवाल अब भी खड़ा है- सच क्या है?
Zubeen Garg Murder or Accident: एक शख्स, एक मौत... लेकिन दो देशों की दो बिल्कुल उलट जांच रिपोर्टें. सिंगापुर पुलिस कहती है उसकी मौत एक दर्दनाक हादसा था, जबकि असम पुलिस का दावा है कि यह सोची-समझी साजिश और कत्ल है. असम की आवाज कहे जाने वाले जुबिन गर्ग की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कानून, जांच और राजनीति के टकराव की कहानी बन चुकी है. पोस्टमार्टम, विसरा रिपोर्ट, शराब, लाइफ जैकेट और चश्मदीदों के बयान.. हर कड़ी कुछ और इशारा करती है. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि जुबिन की मौत कैसे हुई, सवाल यह है कि आखिर सच क्या है?
आखिरकार, जिस रिपोर्ट का हरेक को इंतजार था, वो रिपोर्ट आ गई. 14 जनवरी को सिंगापुर के कोरोनर्स कोर्ट में असम की आवाज जुबिन गर्ग की मौत पर सुनवाई थी. सिंगापुर में कोरोनर्स कोर्ट उस कोर्ट को कहते हैं जहां पर अस्वाभाविक मौत का केस आता है. चूंकि जुबिन की मौत सिंगापुर में डूबने से हुई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की वजह डूबना ही लिखा था, इसीलिए सिंगापुर पुलिस ने इसे एक क्रिमिनल केस यानी मर्डर का केस न मानते हुए जुबिन की मौत को हादसा मान कर इसकी सुनवाई कोरोनर्स कोर्ट में की थी. असल में कोरोनर्स सिंगापुर की कोर्ट का ही एक न्यायिक अफसर होता है, जो पूरे मामले की जांच करता है और फिर कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल करता है.
14 फरवरी को पहली बार सिंगापुर की कोरोर्नस कोर्ट में कोरोनर्स यानी जुबिन की मौत की जांच कर रहे न्यायिक अफसर ने तफ्तीश के बाद कोर्ट के सामने पूरी रिपोर्ट रखी. इस रिपोर्ट के मुताबिक जुबिन गर्ग सितंबर 2025 में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने के लिए सिंगापुर आए थे. 19 सितंबर 2025 को जुबिन गर्ग अपने होटल से निकल कर कैपल बे में मरीना बीच पर एक नाव पर सवाल हुए. नाव पर करीब 20 लोग मौजूद थे. जिनमें जुबिन के दोस्त, बैंड मेंबर भी शामिल थे. चीफ इनवेस्टिगेटिंग अफसर ने कोर्ट को बताया कि नाव पर पहुंचते ही सभी ने पार्टी की. पार्टी में स्नैक्स के अलावा उन लोगों ने शराब पी. नाव पर सवार कई गवाहों ने बताया कि जुबिन ने भी शराब पी थी. एक गवाह का कहना था कि जुबिन ने भी कुछ पैग शराब ली थी. जिनमें जिन, विहस्की और गिनीज स्टाउट के कुछ सिप शामिल थे. नाव लाजरस आईलैंड और सेंट जॉन्स आईलैंड के बीच पानी में रुक गई.
इन्हीं दोनों आईलैंड के बीच जुबिन पहली बार समंदर में उतरे. समंदर में उतरने से पहले जुबिन ने बाकायदा लाइफ जैकेट पहनी हुई थी. लेकिन लाइफ जैकेट का साइज बड़ा था. जुबिन ने पानी में उतरते ही लाइफ जैकेट उतार दी. जुबिन दोबारा जब पानी में उतरने जा रहे थे, तब उन्हें फिर से एक लाइफ जैकेट दी गई. जो पहले के मुकाबले साइज में छोटी थी. लेकिन इस बार खुद जुबिन ने लाइफ जैकेट पहनने से मना कर दिया और बिना लाइफ जैकेट के वो पानी में उतर गए. जुबिन तैरते हुए लाजरस आईलैंड की तरफ बढ़ रहे थे. बिना लाइफ जैकेट के उन्हें इस तरह आगे बढ़ते देख नाव पर मौजूद लोगों ने चीखते हुए उन्हें पानी से वापस नाव पर लाने को कहा. दोस्तों को चीखते सुन जुबिन गर्ग वापस अब नाव की तरफ आने लगते हैं. लेकिन जब वो नाव की तरफ बढ़ ही रहे थे, तभी अचानक उनकी रफ्तार सुस्त पड़ गई और चेहरा पानी के अंदर जाने लगा.
जुबिन को पानी में इस तरह बिना किसी हरकत के देख नाव पर सवार लोग पानी में कूद कर जुबिन को नाव पर ले आते हैं. उन्हें फौरन सीपीआर दी जाती है. तब तक पुलिस कोस्ट गार्ड को भी फोन कर दिया गया था. फोन आते ही पुलिस कोस्ट गार्ड एक पेट्रोल क्राफ्ट यानी स्पीड बोट रवाना कर देती है. 9 मिनट में ये पेट्रोल क्राफ्ट नाव के करीब पहुंच चुका थी. पेट्रोल क्राफ्ट पर मौजूद पुलिस वाले भी जुबिन गर्ग को सीपीआर देते हैं. लेकिन जुबिन की ना तब सांसें चल रही थी और ना ही नब्ज. इसके बाद जुबिन को वहां से करीब 6 किलोमीटर दूर मैरीना साउथ-पेयर तक लाया जाता है, वहां एंबुलेंस पहले से ही आ चुकी थी. उसी एंबुलेंस से जुबिन को सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया जाता है. लेकिन डॉक्टर जुबिन को देखते ही उन्हें मुर्दा करार देते हैं. तब शाम के सवा 5 बजे थे.
उसी सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल में जुबिन गर्ग का पोस्टमार्टम होता है. जिसमें मौत की वजह डूबना बताया गया था. जुबिन के शरीर पर जख्मों के भी कुछ निशान मिले थे. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक शरीर पर चोट के ये निशान जुबिन को पानी से बचा कर नाव पर लाने और सीपीआर देने के दौरान लगे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जुबिन के खून के नमूनो में बीपी और मिर्गी की दवाएं भी मिलीं. इसके अलावा किसी और मेडिसीन के नमूने खून में नहीं मिले.

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