
Dussehra 2025: भारत की वो 7 जगह जहां होती है दशानन की पूजा, नहीं होता रावण दहन
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Dussehra 2025: दशहरे का नाम सुनते ही सबसे पहले रावण दहन का दृश्य सामने आता है. लेकिन, देश में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां यह परंपरा उलटी है मतलब कि उन स्थानों पर रावण को भगवा की तरह पूजा जाता है. आइए जानते हैं उन विशेष स्थानों के बारे में.
Dussehra 2025: दशहरा, हर वर्ष शारदीय नवरात्र के समापन की दशमी तिथि को मनाया जाता है. दशहरा को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, जो कि बुराई का अंत और अच्छाई की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भगवान राम, मां दुर्गा और अस्त्रों की पूजा की जाती है और पूरे देश में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का पुतला जलाया जाता है. लेकिन, आप ये बात जानकर हैरान हो जाएंगे कि जहां पूरे देश में रावण दहन किया जाता है, वहीं कुछ जगहों पर इस दिन रावण की पूजा-उपासना की जाती है. आइए आज हम आपको ऐसी कुछ जगहों से परिचित कराएंगे और साथ ये भी बताएंगे की ऐसा क्यों होता है.
बिसरख गांव
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, बिसरख गांव को दशानन रावण का ननिहाल माना जाता है. इसी कारण इस जगह पर रावण दहन की बजाय, उनका पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ पूजन किया जाता है. बिसरख गांव उत्तर प्रदेश राज्य के ग्रेटर नोएडा शहर में स्थित एक छोटा सा गांव हैं. यहां रावण का मंदिर बना हुआ है.
मंदसौर
मध्य प्रदेश राज्य का मंदसौर में इन्हीं स्थानों में से एक है, जहां रावण दहन की बजाए दशानन की उपासना की जाती है. दरअसल, मंदसौर रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था, जिसकी वजह से यह स्थान रावण का ससुराल कहलाया. इसलिए, पंरपरा के मुताबिक क्योंकि दामाद पूजा जाता है तो रावण को भी इस स्थान पर पूजा जाता है.
रावनग्राम गांव

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