
Bhagwath Chandrasekhar: बॉलर जिसने पोलियो से सूखी बाजू को बनाया हथियार, पिच पर ऐसे किया शिकार
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स्पिन के जादूगर भगवत चंद्रशेखर आज 78 साल के हो गए. 17 मई 1945 को मैसूर (कर्नाटक) में पैदा हुए चंद्रशेखर बचपन में पोलियो के शिकार हो गए थे. लेकिन चंद्रशेखर की यही खामी खूबी में बदल गई.
महज 19 की औसत से 98 विकेट लेकर भारत को 14 टेस्ट मैच जिताए. जिनमें शामिल हैं 42 विकेट, जिनकी बदौलत विदेशी धरती पर 5 टेस्ट जीत मिली. विदेशों में भारत की जीत का सूखा खत्म हुआ. यह कारनामा करने वाले वाले स्पिन के जादूगर भगवत चंद्रशेखर आज 78 साल के हो गए. चंद्रशेखर ने अपने टेस्ट करियर (1964-79) के दौरान 58 टेस्ट मैचों में 29.74 की औसत से 242 विकेट चटकाए.
... दाईं बांह कमजोर पड़ चुकी थी
17 मई 1945 को मैसूर (कर्नाटक) में पैदा हुए चंद्रशेखर बचपन में पोलियो के शिकार हो गए थे. लेकिन चंद्रशेखर की यही खामी खूबी में बदल गई. उनकी कलाई गेंद फेंकते वक्त ज्यादा मुड़ जाती थी, जो उन्हें सामान्य स्पिनरों से अलग करती थी. वास्तव में सबसे तेज लेग-ब्रेक बॉलर रहे, जिसके कारण अच्छे-अच्छे बल्लेबाज आसानी से आउट हो जाते थे.
गेंदबाजी किसी पहेली से कम नहीं
भारत की मशहूर स्पिन चौकड़ी (चंद्रा, बेदी, प्रसन्ना, वेंकटराघवन) में से एक रहे चंद्रा लंबी बाउंसिंग रन-अप के बाद तेज गुगली फेंकते थे. उनका खेल कभी-कभी पहेली-सा लगता था. यहां तक कि वे खुद भी हैरान रह जाते थे (ऐसा उन्होंने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था). पहले दिन बल्लेबाजों के लिए बहुत आसान होते थे, तो दूसरे दिन बड़े खतरनाक हो जाते थे.
इंग्लैंड की धरती पर पहला टेस्ट जिताया

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












