
गौतम गंभीर की प्लानिंग पर उठे सवाल... पर बोर्ड ने T20 वर्ल्ड कप तक सब्र किया
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गौतम गंभीर की कोचिंग पर हालिया न्यूजीलैंड सीरीज हार के बाद सवाल उठ रहे हैं. यह भारत की घरेलू मैदान पर ब्लैककैप्स के खिलाफ पहली द्विपक्षीय हार थी, जिसके बाद सोशल मीडिया और विशेषज्ञों ने रणनीति और चयन को लेकर आलोचना तेज कर दी.
भारतीय क्रिकेट में विवादित कोच कोई नई बात नहीं. ग्रेग चैपल का अध्याय आज भी याद किया जाता है, जब सार्वजनिक आलोचना और आंतरिक मतभेदों ने टीम का माहौल बदल दिया था. हाल के दिनों में गौतम गंभीर के संदर्भ में भी ऐसी तुलना होने लगी है, हालांकि यह तुलना समय से पहले और अनुचित मानी जा रही है.
न्यूजीलैंड के खिलाफ 1-2 से वनडे सीरीज हार ने गंभीर पर आलोचना तेज कर दी. यह 1988 के बाद भारत की घरेलू जमीन पर ब्लैककैप्स के खिलाफ पहली द्विपक्षीय हार थी. सोशल मीडिया पर कोच को हटाने की मांग उठी, पर विशेषज्ञों का मत है कि समस्या इससे अधिक संरचनात्मक है.
गंभीर ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद कहा था कि व्यक्तिगत प्रदर्शन महत्वपूर्ण है, लेकिन कोच के तौर पर सीरीज हार पर संतोष संभव नहीं. उनके इस बयान ने स्पष्ट किया कि टीम प्रबंधन हार को सामान्य नहीं मानता. इसके बावजूद, हर असफलता का ठीकरा गंभीर पर फोड़ना सरलीकरण माना जा रहा है.
टेस्ट और ODI... दोनों में संदर्भ अलग
टेस्ट क्रिकेट में गिरावट दर्ज हुई है और इस पर जवाबदेही तय होगी. वहीं, वनडे सीरीज में भी भारत पूर्ण-शक्ति के साथ नहीं खेला. जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, हार्दिक पंड्या और वरुण चक्रवर्ती अनुपस्थित थे. दूसरी ओर न्यूजीलैंड भी प्रमुख खिलाड़ियों को आराम दे चुका था, क्योंकि T20 विश्व कप निकट है.
चयन नीति पर प्रश्न

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 2026 की ODI सीरीज में भारतीय टीम 1-2 से धराशायी हो गई, और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह हार घरेलू मैदान पर, उस विपक्षी के हाथों हुई जिसने इससे पहले भारत में कभी ODI सीरीज नहीं जीती थी. तीसरे मैच में डेरिल मिचेल (137) और ग्लेन फिलिप्स (106) की धुआंधार साझेदारी ने भारतीय गेंदबाजी की कमजोरी को बेपर्दा कर दिया...












