
900 गणितज्ञों ने माना, किसी काम का नहीं है UGC के गणित का नया सिलेबस
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भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कम से कम 900 गणितज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और स्नातक छात्रों ने यूजीसी के गणित पाठ्यक्रम के लिए बने LOCF (लर्निंग आउटकम्स करिकुलम फ्रेमवर्क) 2025 के खिलाफ एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं. गणितज्ञों ने इसमें भारी कमियां पाई हैं और इसे भविष्य के लिए किसी काम का नहीं माना है.
यूजीसी की ओर से गणित विषय के लिए जो पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट तैयार किया गया है. उसके खिलाफ देशभर के गणितज्ञ, विशेषज्ञ, शोधकर्ताओं और छात्रों ने याचिका दायर की है. इसमें इसे गंभीर दोषों से भरा बताया गया है और कहा गया है कि अगर इसे अपनाया गया, तो यह छात्रों की भावी पीढ़ियों के भविष्य को नुकसान पहुंचाएगा.
याचिका में कहा गया है कि इस पर हस्ताक्षर करने वाले शोधकर्ता, शिक्षक और गणित एवं संबंधित विषयों के स्नातक छात्र, यह मानते हैं कि यूजीसी द्वारा गणित के लिए जो पाठ्यक्रम ड्राफ्ट किया गया है. उसमें गंभीर दोष हैं. इसकी वजह से गणित पर आधारित विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र सहित सभी क्षेत्र प्रभावित होंगे.
ड्राफ्ट को वापस लेने का आग्रह यही वजह है कि हम यूजीसी से आग्रह करते हैं कि वह इस ड्राफ्ट को वापस लें और पाठ्यक्रम को फिर से तैयार करने के लिए विशेषज्ञ गणितज्ञों और स्नातक गणित के शिक्षकों की एक नई समिति का गठन करें.
गणित पाठ्यक्रम के ड्राफ्ट में क्या समस्याएं हैं? याचिका पर हस्ताक्षर करने वाले प्रोफेसरों ने बताया है कि गणित का जो पाठ्यक्रम ड्राफ्ट किया गया है उसमें रीयल एनालिसिस, एलजेब्रा और लिनियर एलजेब्रा को ठीक ढंग से शामिल नहीं किया गया है. पूरे एलजेब्रा को पहले सेमेस्टर में भर दिया गया है. फिर रीयल एनालिसिस को इतनी देर से शुरू किया गया है कि आगे के किसी भी कोर्स के लिए जगह ही नहीं बचती.
इसके अलावा ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का हिस्सा रहे एनालिटिकल ज्योमेट्री, जिसकी आज प्रासंगिकता और इस्तेमाल काफी कम है, उसे इतनी ज्यादा जगह दी गई है कि दूसरे उपयोगी कोर्स के लिए ही इसमें जगह ही नहीं बचती है.
अप्लाइड मैथमेटिक्स को नहीं दिया गया है महत्व इस सिलेबस में अप्लाइड मैथमेटिक्स को कम महत्व दिया गया है. वहीं प्रोग्रामिंग और न्यूमेरिकल मैथड को कोर विषय से बाहर रखा गया हैं. सांख्यिकी को एक ही कोर्स में ठूंस दिया गया है. सांख्यिकी, मशीन लर्निंग, एआई आदि पाठ्यक्रम जो प्रैक्टिकल और एप्लिकेशन बेस्ड हैं, इन्हें खत्म कर दिया गया है.

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