
5000 साल पहले महिला को इस वक्त आया था साबुन बनाने का आइडिया, फिर ऐसे बना दिया!
AajTak
साबुन का इस्तेमाल हर एक घर में होता है. शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इसके इस्तेमाल से अछूता रहा होगा. हर घर में आसानी से उपलब्ध साबुन के बारे में शायद की किसी को मालूम हो कि यह गीजा के पिरामिड के बनने से पहले से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. जानते हैं आज इसी साबुन की कहानी.
साबुन एक ऐसी चीज है, जो हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है. फिर भी इसे कमतर आंका जाता है. हर दिन साबुन का इस्तेमाल करने के बावजूद शायद ही इसे व्यापक लाभ और जीवनरक्षक गुणों की ओर लोगों का ध्यान जाता होगा. ऐसे में जानते हैं रोज इस्तेमाल होने वाला साबुन कितना पुराना है और इसे किसने बनाया?
डच ग्लासमेकर एंटोनी फिलिप्स वान लीउवेनहॉक ने 1668 में अपने माइक्रोस्कोप से पहली बार उन छोटे जीवों का अस्तित्व देखा था, जो हर जगह मौजूद होते हैं. चाहे वो हमारे हाथ हों या चेहरा. सिर्फ माइक्रोस्कोप से ही देखे जा सकने वाले ये जीव बैक्टिरिया होते हैं. ऐसे में जब हम अपने हाथ या शरीर पर साबुन मलते हैं तो ये उनमें से कई जानलेवा बैक्टिरिया को खत्म कर देते हैं.
मानव इतिहास की सबसे बड़ी चिकित्सा खोज ऐसे में साबुन को मानव इतिहास की सबसे बड़ी चिकित्सा खोज कहा जा सकता है. क्योंकि यह ऐसी चीजों को साफ कर देता है जिसे आप देख नहीं सकते. साबुन एक स्वस्थ व्यक्ति की जान भी बचाता है, जो इस बात से अनजान होता है. अब सवाल ये उठता है कि साबुन का निर्माण हुआ कैसे और किसे इस महत्वपूर्ण चीज को बनाने का श्रेय जाता है.
5000 साल पहले खोजी गई साबुन बनाने की विधि टाइम की रिपोर्ट के अनुसार, साबुन बनाने की शुरुआती विधि का जिक्र सुमेरियन सभ्यता के अभिलेखों में मिला है. सुमेरियन सभ्यता में निनी नाम की एक महिला का जिक्र है, जिसने शुरुआती साबुन का फॉर्मूला तैयार किया था.
कपड़ा मिल में हुआ साबुन का जन्म वह महिला सुमेरिया के फलते-फूलते कपड़ा उद्योग में काम करती थी. मानव विज्ञानी जॉय मैककॉरिस्टन ने बताते हैं कि सुमेरिया सभ्यता में यह उद्योग महिलाओं के प्रभुत्व वाला था. निनी का जन्म 4,500 साल पहले, आज के दक्षिणी इराक में, संभवतः प्राचीन सुमेरियन शहर गिरसू में हुआ था.
वहां साबुन निर्माण का विवरण देने वाली सबसे पुराना लिखित अभिलेख मिला है. इसके अनुसार निनी का जन्म गीजा के महान पिरामिड के निर्माण के समय के आसपास हुआ था और आज के औसत व्यक्ति से थोड़ी छोटी होने के अलावा, वह दिखने में पूरी तरह से आधुनिक थीं.

Chalisa Yog: ज्योतिष शास्त्र में चालीसा योग उस स्थिति को कहा जाता है जब दो ग्रह आपस में 40 अंश (डिग्री) की दूरी पर स्थित होते हैं. इस योग का नाम ही “चालीसा” है, क्योंकि इसका संबंध 40 अंश के अंतर से होता है. चालीसा योग का प्रभाव हर राशि पर समान नहीं होता. यह ग्रहों की स्थिति, भाव और व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है कि यह योग शुभ फल देगा या सावधानी की जरूरत पैदा करेगा.

Nikon Z5II review: एक कैमरा खरीदना चाहते हैं और अभी कैमरा यूज में प्रो नहीं हैं, तो आपको कम बजट वाला एक ऑप्शन चुनना चाहिए. ऐसे ही एक कैमरे को हमने पिछले दिनों इस्तेमाल किया है, जो शुरुआती बजट में आता है. इसका इस्तेमाल आप फोटो और वीडियो दोनों ही काम में कर सकते हैं. आइए जानते हैं Nikon Z5II की खास बातें.











