
5 राज्यों में करारी हार, फिर सवालों के घेरे में गांधी परिवार! चिदंबरम बोले- सब जिम्मेदार
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पी. चिदंबरम ने कहा कि 1977 में कांग्रेस खात्मे की कगार पर पहुंच गई थी. लेकिन तब भी हमने हिम्मत नहीं हारी और लड़ाई जारी रखी. इसी तरह हम आज भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. लेकिन हम इससे लड़ने के लिए तैयार हैं.
पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त मिलने के बाद मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं. कांग्रेस पार्टी लगातार बैठक कर हार के कारणों की समीक्षा कर रही है. पिछले दिनों इस पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक भी हुई थी. बैठक में हार के कारणों की समीक्षा की गई. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष के पद से इस्तीफे की पेशकश भी की थी, लेकिन इसे अस्वीकर कर दिया गया.
इन सभी सरगर्मियों के बीच अब गांधी परिवार को भी हार के लिए निशाना बनाया जाने लगा है. इस मु्द्दे पर कांग्रेस के सीनियर नेता पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत की. इस बातचीत में उन्होंने चुनावी शिकस्त के लिए किसी भी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि हार की जिम्मेदारी सभी की है.
पी. चिदंबरम ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब कांग्रेस को इस तरह की हार का सामना करना पड़ा है. मुझे आज भी 1977 का दौर याद है, जब कांग्रेस खात्मे की कगार पर पहुंच गई थी. ये बात सही है कि हम चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. हमारे सामने चुनौती गंभीर और बड़ी है. लेकिन हम इससे लड़ने के लिए तैयार हैं.
चिदंबरम ने आगे कहा कि इस हार के लिए सभी जिम्मेदार हैं. पांचों चुनावी राज्य में पार्टी के महासचिव, सचिव और इंचार्ज तैनात थे. मैं गोवा में सीनियर ऑब्जर्वर था. मिस्टर बघेल (Bhupesh Baghel) उत्तर प्रदेश के सीनियर ऑब्जर्वर थे. और भी दूसरे नेता अलग-अलग राज्यों में तैनात थे. इसलिए हार की जिम्मेदारी सभी की है. गोवा के लिए मैं जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं. मेरे साथी गोवा के प्रभारी दिनेश गुंडूराव ने भी हार की जिम्मेदारी ली है. हमें मिलकर ही इसका जवाब ढूंढना होगा.
हार के बाद गांधी परिवार पर उठ रहे सवालों पर चिदंबरम ने कहा कि गांधी परिवार को निशाना बनाना गलत है. सोनिया गांधी ने CWC मीटिंग में कहा था कि वे किसी भी तरह का त्याग करने के लिए तैयार हैं. लेकिन अगस्त में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव होने वाला है. अगर अभी नेतृत्व में परिवर्तन किया जाता तो फिर किसी को अंतरिम अध्यक्ष बनाना पड़ेगा. अंतरिम अध्यक्ष को हटाकर दोबारा किसी को अंतरिम अध्यक्ष बनाने का कोई मतलब नहीं है. बैठक में मौजूद सभी नेता यही चाहते थे कि पार्टी के आंतरिक चुनाव के जरिए ही नए पूर्णकालिक अध्यक्ष का चयन किया जाए.
उन्होंने आगे कहा कि सच्चाई यह है कि हमने 5 राज्यों के चुनाव में हार का सामना किया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी बिना सोचे समझे निर्णय लेने लगे. अगस्त में पार्टी के आंतरिक चुनाव होने वाले हैं. इसमें ही कांग्रेस के नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा.

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