
3.5 अरब डॉलर की आर्थिक मदद के लिए PM मोदी का आभार: साजिथ प्रेमदासा
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1948 में आजाद हुआ श्रीलंका इस वक्त अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है. वहां महंगाई बेकाबू हो चली है. ऐसे में वहां हिंसक प्रदर्शन भी शुरू हो गए, महिंदा राजपक्षे पीएम पद से इस्तीफा देकर पूरे परिवार के साथ भाग खड़े हुए. इसी बीच विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा ने आजतक से ख़ास बातचीत की है.
श्रीलंका को हिंसा की आग में झोंक कर प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पूरे परिवार के साथ भाग खड़े हुए. सोमवार को उग्र भीड़ ने कोलंबो में राजपक्षे के सरकारी आवास को घेर लिया था. जनता के गुस्से को कम करने के लिए उन्हें पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन इस्तीफे के बाद भी गुस्सा कम नहीं हुआ. ऐसे में उन्होंने इस्तीफा दिया और उधर उनके सरकारी आवास में सेना का हेलिकॉप्टर उतरा. आनन-फानन में पूरा राजपक्षे परिवार इसमें सवार हुआ और कोलंबों में उग्र प्रदर्शनकारियों से जान बचाकर भाग निकला.
श्रीलंका के बिगड़े हालातों के बीच नए प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में विपक्ष के नेता और सांसद साजिथ प्रेमदासा का नाम तेजी से चर्चा में आ गया. तमाम चर्चाओं के बीच साजिथ ने आजतक से ख़ास बातचीत की. जिसमें उन्होंने अपने भविष्य के प्लान के साथ साथ श्रीलंका के मौजूदा हालातों पर बात की.
साजिथ प्रेमदासा ने कहा कि राजपक्षे प्रशासन द्वारा किया गया आर्थिक कुप्रबंधन श्रीलंका में आर्थिक युद्ध के लिए जिम्मेदार है. लेकिन निश्चिंत रहें हम जीतेंगे. श्रीलंका कुछ ही समय में वापस सामान्य हो सकता है, लेकिन हमें कठोर निर्णय लेने होंगे. उन्होंने कहा कि 2019 में देश के अधिकांश लोगों को वर्तमान राष्ट्रपति से बहुत उम्मीद थी, लेकिन अक्षम सरकार और अप्रभावी प्रशासन ने देश को गर्त में पहुंचा दिया. ये भी पढ़ें-- श्रीलंका जैसे ही ये 7 देश भी हो गए थे तबाह, जानिए इन डिफॉल्टर मुल्कों के लोगों के सामने क्या-क्या संकट आए
प्रेमदासा ने कहा कि मैंने अपने पिता की हत्या के 6 से 7 साल बाद राजनीति में प्रवेश किया. मैंने अपने पिता के बिना राजनीतिक यात्रा शुरू की. श्रीलंका में वंशवाद की राजनीति की कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा कि हमें लोगों की प्रतिभा पर ध्यान देना चाहिए. उन दिनों एईट्रोक्रेसी को श्रेय दिया जाता था लेकिन अब यह मेरिटोक्रेसी है.
अगर भविष्य के पीएम बने तो क्या कार्य योजना होगी?
प्रेमदासा ने कहा कि लंका की जनता को आवश्यक चीजें सबसे पहले मिलनी चाहिए. मोटे तौर पर हमें अगले 6 महीनों के लिए प्रति माह लगभग 500 मिलियन डॉलर की आवश्यकता है. हमें उर्वरकों के लिए अधिक धन की आवश्यकता है, बैंकों में लिक्विडिटी में सुधार के लिए पैसों की आवश्यकता है. हम सरकार बनाने के लिए तैयार हैं, लेकिन राष्ट्रपति राजपक्षे को इस्तीफे की घोषणा करनी होगी.

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