
3 दशक बाद एक बार फिर रूस पर गहरा रहा टूटने का खतरा, कौन से हिस्से हैं, जो खुद को आजाद मुल्क बनाना चाहते हैं?
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एक वक्त पर हर बात में अमेरिका से आगे रहता सोवियत संघ रातोरात टूटकर कई टुकड़ों में बंट गया. तब भी हालात कुछ ऐसे ही थे. देश में राजनैतिक भूचाल आया हुआ था. अलगाववादी ताकतों ने लोहा गरम पाते ही वार किया और अपना-अपना हिस्सा अलग कर दिया. यूक्रेन से लड़ाई के बीच फिर ये अंदेशा जताया जा रहा है कि अबकी बार रूस का बंटवारा न हो जाए.
इतने समय से यूक्रेन खुद को सिर्फ बचाने का काम कर रहा था. अब जाकर वो रूस पर हमलावर हुआ. हालांकि यूक्रेन के बड़े हिस्से पर अभी भी रूस का कब्जा है. इस बीच ये अनुमान भी लगाया जा रहा है कि लड़ाई ज्यादा खिंचने पर रूस एक बार फिर कई टुकड़ों में टूट सकता है. असल में 90 के दशक में सोवियत संघ टूटकर 15 देशों में बदल गया था, जिनमें एक रूस भी था. लेकिन अब रूस के भीतर भी कई अलगाववादी संगठन एक्टिव हैं, जो मौके की ताक में हैं.
यूक्रेन हो रहा काउंटर ऑफेंसिव
रूस-यूक्रेन लड़ाई फिलहाल थमने के आसार नहीं दिख रहे. कमजोर माने जाते यूक्रेन ने जमकर मुकाबला किया. साथ ही उसे कई देशों से काफी मदद भी मिली. इससे हुआ ये कि जिस युद्ध के फटाफट खत्म होने के अनुमान थे, वो सवा साल से चल रहा है. अब दोनों देशों के बीच एक नई चीज ये हुई कि यूक्रेन भी रूस पर जवाबी हमला करने लगा है. यहां तक कि मॉस्को के राष्ट्रपति आवास पर भी ड्रोन हमला कथित तौर पर यूक्रेन ने करवाया.
रूस में बदल रही तस्वीर
टक्कर की इस लड़ाई का असर रूस पर भी होने लगा. वहां महंगाई बढ़ रही है. यहां तक कि राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ भी सुगबुगाहट होने लगी है. इस बीच ये भी कयास लग रहे हैं कि देश को कमजोर पाकर सेपरेटिस्ट संगठन दोबारा सिर न उठा लें. रशियन फेडरेशन या रूस में नस्ल, धर्म और आर्थिक आधार पर अलग-अलग टुकड़े खुद को अलग देश बनाए जाने की मांग करते रहे.
अलग स्ट्रक्चर है रूस का

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