
दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनेगा भारत? दावोस में क्या बोले ग्लोबल एक्सपर्ट्स
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मजबूत विकास दर, गहरे होते सुधार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब कड़े फैसलों और तेज क्रियान्वयन की जरूरत है. इसी विषय पर इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया.
दुनिया के बहुत कम देश इस साल दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उतनी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ पहुंचे हैं, जितना भारत. मजबूत विकास दर, गहरे होते सुधार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब कड़े फैसलों और तेज क्रियान्वयन (एक्जीक्यूशन) की जरूरत है.
इसी विषय पर इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसका संचालन इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने किया. सत्र में दिग्गज अर्थशास्त्री, सीईओ और केंद्रीय मंत्री ने इस बात का विश्लेषण किया कि भारत को आगे क्या करने की आवश्यकता है.
भारत का ‘मोमेंटम मोमेंट’
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर और प्रसिद्ध भारीतय-अमेरिकी अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने अर्थव्यवस्था को नया रूप देने वाली प्रगति को स्वीकार करते हुए चर्चा की शुरुआत की. उन्होंने सबसे पहले भारत की अब तक की उपलब्धियों को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण बेहद प्रभावशाली रहा है. जीएसटी में जो किया गया, खासकर हालिया सरलीकरण, वह अर्थव्यवस्था के लिए बेहद मददगार है.”
जब कली पुरी ने उनसे पूछा कि इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब भारत को क्या करना चाहिए? तो गोपीनाथ का जवाब स्पष्ट था. उन्होंने कहा, "इस मोमेंटम को बनाए रखना, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना और 2047 के 'विकसित भारत' के लक्ष्य तक पहुंचना ही असली चुनौती है. आज भारत की बुनियाद मजबूत है. न सिर्फ विकास दर के लिहाज से, बल्कि महंगाई भी लो सिंगल डिजिट में है. यह भारत के लिए अच्छी स्थिति है.”
हालांकि, उन्होंने कुछ पुराने अवरोधों की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा, "भारत में जमीन अधिग्रहण करना, साफ-सुथरी जमीन के मालिकाना हक होना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जो विकास और मैन्युफैक्चरिंग में बाधा डालती है." उन्होंने न्यायिक सुधारों को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.

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