
बस एक मुलाकात और पिघल गए US राष्ट्रपति... ग्रीनलैंड पर हंगामे के बीच नाटो चीफ क्यों कहलाए Trump Whisperer
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मार्क और उन्होंने ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र पर एक भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क तय करने पर सहमति बना ली है इसलिए अब यूरोपीय देशों पर वह टैरिफ नहीं लगाएंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और NATO के महासचिव मार्क रुट्टे ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान एक द्विपक्षीय बैठक की. यह बैठक उस समय हुई जब ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने और नियंत्रण की बात करते हुए विवाद खड़ा कर दिया था. कई यूरोपीय नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया और तनाव बढ़ गया था.
लेकिन दावोस में इस मुलाकात के बाद ट्रंप का यूरोप और नाटो को लेकर गुस्सा शांत नजर आया और ट्रंप यूरोपीय देशों पर लगाए गए 10 फीसदी टैरिफ से पीछे हट गए.
रुट्टे और ट्रंप की बातचीत का केंद्र ग्रीनलैंड को लेकर नियंत्रण का विवाद नहीं था, बल्कि पूरे आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता थी. रुट्टे ने स्पष्ट किया कि बातचीत में ग्रीनलैंड की संप्रभुता या इसे डेनमार्क से अलग करने का मुद्दा नहीं उठाया गया. दोनों नेताओं ने आर्कटिक के बढ़ते वैश्विक तनाव, रूस-चीन की बढ़ती गतिविधियों और NATO सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है.
इस बैठक के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने रुट्टे के साथ एक भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क तय किया है, जो ग्रीनलैंड और व्यापक आर्कटिक क्षेत्र में NATO सहयोग को मजबूत करेगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता अमेरिका और NATO देशों दोनों के हित में है और इसी वजह से उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगने वाले टैरिफ की धमकी वापस ले ली.
ट्रंप ने कहा कि वे एक फरवरी से लागू होने वाले 10 फीसदी टैरिफ को लगाना नहीं चाहते. इससे पहले वे यूरोपीय देशों को यह टैरिफ लगा देने की चेतावनी दे रहे थे अगर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात नहीं मानी गई. उन्होंने यह भी कहा कि वे सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे और परिस्थितियों को कूटनीति से संभालना चाहते हैं. बता दें कि यह टैरिफ एक फरवरी से लगने वाला था.
नाटो चीफ को Trump Whisperer क्यों कहा जा रहा?

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