
ट्रंप की टैरिफ चाल उल्टी पड़ेगी… भारत-यूरोपीय यूनियन की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से दुनिया में क्या बदलेगा?
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यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच होने वाला यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े सौदों में से एक हो सकता है, क्योंकि दोनों मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति अब उल्टा असर दिखाने लगी है. कनाडा द्वारा चीन के साथ किए गए अलग तरह के वाहन व्यापार समझौते के बाद अब यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत के साथ एक बड़े मेगा डील का ऐलान किया है. इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भी कहा जा रहा है.
यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी के बीच भारत के राजकीय दौरे पर आने वाली हैं. यह दौरा 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान होगा, जहां दोनों मुख्य अतिथि होंगे. इसके साथ ही 27 जनवरी को दोनों नेता 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे.
भारत और EU मिलकर कितने बड़े हैं?
यूरोपीय संघ और भारत के बीच होने वाला यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े सौदों में से एक माना जा रहा है. EU में 27 देश शामिल हैं, जिनमें फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, स्वीडन और पोलैंड जैसे देश शामिल हैं. EU की कुल आबादी करीब 45 करोड़ है. भारत और EU की कुल आबादी मिलाकर 191.3 करोड़ होती है, जो कि दुनिया की कुल आबादी का 23 प्रतिशत है.
वर्ल्ड बैंक के आंकड़े कहते हैं कि अगर नाममात्र GDP (Nominal GDP) की बात करें तो 2024 में भारत और EU की संयुक्त GDP 23.41 ट्रिलियन डॉलर रही, जो कि वैश्विक GDP का 21 प्रतिशत है.
निर्यात के मामले में, भारत और यूरोपीय यूनियन मिलकर दुनिया के कुल निर्यात का 33 प्रतिशत और कुल आयात का 32 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं.

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