
'हमारा कोई लेना-देना नहीं...', ग्रीनलैंड पर ट्रंप के कब्जा वाले प्लान पर बोले पुतिन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की मांग से नाटो देशों में मची खलबली के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है. उन्होंने बुधवार देर रात सुरक्षा परिषद की बैठक में स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड के साथ जो कुछ भी होता है, उससे रूस का कोई काम नहीं है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. पुतिन का कहना है कि ये मामला हमारे कोई काम का नहीं है और उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि वह इसको आपस में सुलझा लेंगे. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हर कीमत पर ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जा करने के बयानों से डेनमार्क में हड़कंप मचा हुआ है और नाटो (NATO) देशों में भी इसका असर दिख रहा है जो ट्रंप के इस कदम को NATO की एकता कमजोर करने वाला कदम बता रहे हैं.
'रूस के लिए चिंता का विषय नहीं' इसी संदर्भ में बुधवार रात राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में टीवी पर दिए गए अपने बयान में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड से जुड़ा कोई भी विकास रूस के लिए चिंता का विषय नहीं है. पुतिन ने कहा, 'ग्रीनलैंड के साथ जो भी होता है, वह हमारे कोई काम नहीं है. मुझे लगता है कि वे खुद ही इस मामले को सुलझा लेंगे.'
डेनमार्क ने अपनाया क्रू रवैया: पुतिन पुतिन ने डेनमार्क के ग्रीनलैंड के प्रति ऐतिहासिक रवैये का भी जिक्र किया. उन्होंने टिप्पणी की कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड को एक कॉलोनी की तरह ही व्यवहार किया है और उसके साथ काफी कठोर, बल्कि क्रूरता भरा रवैया अपनाया है. लेकिन ये मामला पूरी तरह से अलग है और फिलहाल किसी को भी इसमें दिलचस्पी नहीं होगी.
डेनमार्क ने US को बेचा वर्जिन आइलैंड्स रूसी राष्ट्रपति ने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि डेनमार्क ने 1917 में वर्जिन आइलैंड्स को संयुक्त राज्य अमेरिका को बेच दिया था. इसी तरह उन्होंने याद दिलाया कि 1867 में रूस ने अलास्का को अमेरिका को मात्र 7.2 मिलियन डॉलर में बेच दिया था. पुतिन का ये बयान ऐसे वक्त में आया है, जब ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी मांग से पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. रूस ने इस मुद्दे पर खुद को अलग-थलग रखते हुए साफ संकेत दिया है कि वह इसमें किसी तरह की दखलंदाजी नहीं करना चाहता और इसे अमेरिका-डेनमार्क के बीच का द्विपक्षीय मामला मानता है.

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