
'वे मुझे डैडी कहते हैं...', नाटो पर बरसते हुए ट्रंप ग्रीनलैंड और आइसलैंड में हो गए कंफ्यूज?
AajTak
पिछले साल जून में जब अमेरिका ने तेरहान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला किया था तो नाटो के महासचिव मार्क रुत्ते ने ट्रंप को डैडी कहा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया. ट्रंप ने इस मंच से नाटो की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ समय पहले तक यूरोपीय देश और नाटो के नेता उनसे बहुत खुश थे.
ट्रंप ने दावा किया कि जब वे नाटो के लिए अधिक सख्ती दिखाते थे और रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए यूरोप पर दबाव डालते थे, तब वही नेता उनके नेतृत्व को स्वीकार करते थे. इसी संदर्भ में ट्रंप ने कहा कि वे मुझे डैडी कहते थे.
ट्रंप ने कहा कि मैं नाटो की मदद कर रहा था. पिछले दिनों जब मैंने उन्हें आइसलैंड के बारे में बताया तो उन्हें ये पसंद आया. उन्होंने आखिरी बार मुझे डैडी कहा. एक बहुत ही स्मार्ट आदमी ने कहा कि वह हमारे डैडी हैं.
हालांकि, यहां आइसलैंड और ग्रीनलैंड को लेकर भ्रम की स्थिति यहां भी देखने को मिली. ट्रंप ने यहां आइसलैंड का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों तक, जब मैंने उन्हें (नाटो) आइसलैंड के बारे में बताया, वे मुझसे बहुत प्यार करते थे. उन्होंने मुझे ‘डैडी’ तक कहा था.
बता दें कि उन्होंने यहां आइसलैंड का जिक्र किया, जबकि आइसलैंड एक स्वतंत्र देश है और नाटो का सदस्य तो है, लेकिन उसका ग्रीनलैंड से कोई लेना-देना नहीं है जबकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है. गौरतलब है कि पिछले साल नाटो के महासचिव ने वास्तव में ट्रंप को डैडी कहा था.
ट्रंप ने नाटो नेताओं की धारणा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं इसे चला रहा था और अचानक एक भयानक इंसान बन गया. ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मांग को सही ठहराते हुए ट्रंप ने कहा कि मैं जो मांग रहा हूं, वह बर्फ का एक टुकड़ा है, जो दुनिया की शांति और वैश्विक सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है. यह बहुत छोटी सी मांग है, उसके मुकाबले जो हमने उन्हें कई-कई दशकों से दिया है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








