
पाकिस्तान ने स्वीकार किया ट्रंप का न्योता... गाजा में शांति के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' में होगा शामिल
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज को इस बहुपक्षीय बोर्ड में शामिल होने का आमंत्रण दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी इस बोर्ड में शामिल होने का आमंत्रण मिला है.
पाकिस्तान ने बुधवार को गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने की घोषणा की है. पाकिस्तान सरकार ने कहा कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत गाजा शांति योजना के क्रियान्वयन को समर्थन देने की उसकी कोशिशों का हिस्सा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस बहुपक्षीय बोर्ड में शामिल होने का आमंत्रण दिया था, जिसे पाकिस्तान ने स्वीकार कर लिया है. इस बोर्ड का गठन गाजा युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल करने के उद्देश्य से किया गया है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान की भागीदारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 में उल्लिखित उद्देश्यों के अनुरूप होगी. पाकिस्तान ने उम्मीद जताई कि बोर्ड ऑफ पीस के गठन से गाजा में स्थायी संघर्षविराम, फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता में बड़े पैमाने पर वृद्धि, और युद्ध से तबाह हो चुके गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.
पाकिस्तान की उम्मीदें और फलस्तीन पर रुख
पाकिस्तान ने अपने बयान में फिलिस्तीन मुद्दे पर अपने पारंपरिक रुख को दोहराते हुए कहा कि वह फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता रहेगा. इस्लामाबाद ने एक विश्वसनीय और समयबद्ध राजनीतिक प्रक्रिया की मांग की, जो अंतरराष्ट्रीय वैधता और संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप हो. पाकिस्तान ने स्पष्ट किया कि उसका लक्ष्य 1967 से पहले की सीमाओं पर आधारित एक स्वतंत्र, संप्रभु और भौगोलिक रूप से जुड़े फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना है, जिसकी राजधानी अल-कुद्स अल-शरीफ (यरूशलम) हो.
पाकिस्तान ने कहा कि वह बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनकर न केवल इन राजनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में, बल्कि गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष से प्रभावित फिलिस्तीनी नागरिकों के दुख और पीड़ा को कम करने में भी रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है.

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