
1947 युद्ध से एयरस्ट्राइक तक... जब जब पाकिस्तान ने की गलती, हर बार मिला मुंह तोड़ जवाब
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चाहें 1947 हो, 1965 हो या 1971 और 1999 में, पाकिस्तान ने हर बार भारत के पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश की, हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी. इसी तरह 2016 में भारत ने उरी हमले के बदले सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को घुटनों के बल ला दिया था. अब अनंतनाग में हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग होने लगी है.
जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में तीन अफसरों और एक जवान की शहादत से देशभर में गम का माहौल है. लोग नम आंखों से देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन जांबाज जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं. इन अफसरों पर हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है. TRF पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का ही धड़ा है. घाटी में घुसपैठ और इस हमले के पीछे भी पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI का हाथ बताया जा रहा है. ऐसे में एक बार फिर पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग उठने लगी है. ऐसा पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान ने इस तरह की गलती की हो, इससे पहले भी पाकिस्तान घाटी में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की कोशिश करता रहा है, लेकिन हर बार उसे मुंह तोड़ जवाब मिला है.
1947 युद्ध
भारत और पाकिस्तान साल 1947 में आजाद हुए थे. लेकिन आजादी के कुछ दिन बाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ गई. इस युद्ध की वजह कश्मीर ही थी. पाकिस्तानी सेना के समर्थन से कबायली सेनाओं ने कश्मीर में घुसकर कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद भारतीय सेना और कबायलियों के बीच जंग हुई. 22 अप्रैल, 1948 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पास हुआ, इसके बाद दोनों देशों की तत्कालीन स्थिति को ही स्थाई बना दिया गया. इसे नियंत्रण रेखा LoC कहा जाता है.
1965 का युद्ध
1947 में मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान बाज नहीं आया. अगस्त 1965 में पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया. इस बार भी कश्मीर को अपने में मिलाना ही मकसद था. इसके जवाब में भारत ने पश्चिमी पाकिस्तान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए. यह जंग 17 दिन तक चली. तत्कालीन सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद युद्धविराम घोषित किया गया.

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