
15 साल बाद बिछड़े पिता-पुत्र का राजकोट अस्पताल में हुआ मिलन, बेटे ने पहली बार देखा चेहरा
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राजकोट सिविल अस्पताल में सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति की पहचान उजागर होने पर सामने आया कि वह उत्तराखंड से 15 साल पहले लापता हुए वासुदेव जोशी हैं. अस्पताल के प्रयासों से उनका बेटा और भाई उनसे मिल सके. पहली बार पिता से मिलकर भावुक हुए बेटे ने अस्पताल का आभार जताया.
गुजरात के राजकोट सिविल अस्पताल में हाल ही में एक ऐसा मानवीय दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं. अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग ने न केवल एक ज़िंदगी को बचाया, बल्कि 15 वर्षों से बिछड़े उत्तराखंड के पिता-पुत्र को मिलाकर एक मिसाल कायम कर दी.
दरअसल, यह कहानी शुरू होती है 31 मार्च से, जब पुलिस ने एक अज्ञात 45 वर्षीय व्यक्ति को गंभीर हालत में अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया. सड़क हादसे में घायल इस व्यक्ति की हालत नाजुक थी, पसलियां टूटी हुई थीं, ब्रेन हेमरेज हो चुका था और दोनों पैरों की हड्डियां भी क्षतिग्रस्त थीं. उस वक्त कोई नहीं जानता था कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार के पुनर्मिलन की शुरुआत है.
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अस्पताल में उन्हें वासुदेवभाई जोशी के नाम से पहचाना गया, जिनकी हालत इतनी गंभीर थी कि बचने की संभावना बेहद कम थी. लेकिन डॉक्टरों की टीम ने हार नहीं मानी. डॉ. शैलेश रामवत, डॉ. जय तुरखिया के नेतृत्व में डॉ. धवल काकड़िया, डॉ. हिरेन कटारिया, डॉ. ऋत्विक कानाणी और अन्य रेजिडेंट डॉक्टरों ने मिलकर दिन-रात मेहनत की. तीन जटिल ऑपरेशनों के बाद आखिरकार वासुदेवभाई को होश आया.
जब वासुदेवभाई होश में आए, तो उनकी पहचान जानने का प्रयास शुरू हुआ. बातचीत में उन्होंने बताया कि वे उत्तराखंड के चंपावत जिले के निवासी हैं. इस जानकारी के आधार पर अस्पताल प्रशासन ने उत्तराखंड पुलिस से संपर्क किया. जांच में यह सामने आया कि वासुदेवभाई के गुमशुदगी की रिपोर्ट सालों पहले उनके परिवार द्वारा दर्ज कराई गई थी.
उत्तराखंड पुलिस ने परिवार को सूचित किया

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