
हर साल 200 हादसे, सैकड़ों मौतें... जानें फिर भी क्यों सबसे सेफ माना जाता है फ्लाइट का सफर
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आंकड़े बताते हैं कि हवाई सफर करना ज्यादा सुरक्षित है. सड़क और रेल से सफर करना ज्यादा खतरे भरा है. जानकारों का भी कहना है कि हवा में 38 हजार फीट की ऊंचाई पर सफर करना जमीन पर ड्राइविंग करने से ज्यादा सेफ है. ऐसे में जानते हैं कि सैकड़ों हादसे और मौतों के बावजूद हवाई यात्रा को सेफ क्यों माना जाता है?
नेपाल में बुधवार को एक बड़ा विमान हादसा हुआ. इस विमान में 19 लोग सवार थे, जिनमें से 18 की मौत हो गई. हादसे में एकमात्र पायलट की ही जान बच सकी. जो विमान हादसे का शिकार हुआ, वो सौर्य एयरलाइंस का बॉम्बार्डियर CRJ-200 एयरक्राफ्ट था.
ये हादसा काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट पर हुआ. सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि विमान पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जा रहा था, लेकिन टेकऑफ होते ही कुछ मिनटों के अंदर ये दाईं और मुड़ गया रनवे पर ही क्रैश हो गया. इस विमान को दाईं की जगह बाईं ओर मुड़ना था. हादसे के वीडियो में दिख रहा था कि ये एयक्राफ्ट पूरी तरह जलकर खाक हो गया था.
ये इस साल का अब तक का सबसे बड़ा विमान हादसा है. इससे पहले मार्च में रूसी वायुसेना का एक प्लेन क्रैश हुआ था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी.
नेपाल में हवाई सफर को सबसे अनसेफ माना जाता है. उसकी वजह नेपाल का पहाड़ों से घिरा होना और तेजी से मौसम बदलना है. पिछले साल ही जनवरी में येति एयरलाइंस का विमान क्रैश हो गया था. इस हादसे में 72 यात्रियों की मौत हो गई थी. बीते 24 साल में नेपाल में विमान हादसों में 350 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन क्रैश हो चुके हैं. प्लेन क्रैश की 813 घटनाओं में 1,473 यात्रियों की मौत हो चुकी है.
सबसे ज्यादा विमान हादसे लैंडिंग के दौरान होते हैं. इन सात साल में लैंडिंग के दौरान 261 हादसे हुए हैं. उसके बाद 212 हादसे उड़ान के दौरान ही हुए हैं.

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