
सोशल मीडिया पर दोस्ती, विदेश यात्रा और फिर नरक बना जीवन... अबू धाबी में शहजादी के पास अब जिंदगी के सिर्फ 3 दिन!
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मोहब्बत में धोखा खाई, धोखे से अबू धाबी ले जाई गई, अबू धाबी में इलाज के नाम पर धोखा खाया, धोखे के हाथों बेची गई, धोखे में घर की नौकरानी बनी और फिर उसी धोखे और फरेब ने उसे क़ातिल बना दिया. अब ऐसे में इतने सारे धोखों के बीच अगर बेकसूर और बेगुनाह शहजादी को गोली मार कर मौत की सजा दी जाती है, तो ये कैसा और कहां का इंसाफ होगा?
भारत की बेटी शहजादी अबू धाबी की जेल में बंद है. उसे मौत की सजा मिली है. लेकिन शहजादी को अब भी बचाया जा सकता है. उस एक झूठे कत्ल के मामले में फंसाया गया है. मामला है 4 महीने के बच्चे के कत्ल का. यूपी के बांदा जिले की रहने वाली शहजादी को 20 सितंबर के बाद गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी. लेकिन शहजादी को बचाने का अब भी एक रास्ता है. चलिए आपको बताते हैं, उस रास्ते की पूरी कहानी.
जिंदगी और मौत के बीच जंग अबू धाबी की जेल का नाम है अल-वाथबा जेल. अरबी शब्द अल वाथबा का मतलब है- छलांग. इस वक़्त इस जेल के अंदर जिंदगी और मौत के बीच की एक छलांग को लेकर जंग जारी है. इस जंग में जिंदगी हारती है या मौत जीतती है, इसका फैसला आने में अब एक हफ्ते से भी कम दिन बचे हैं. 20 सितंबर के बाद की कोई भी एक तारीख़ इस जेल में बंद हिंदुस्तान की शहज़ादी की जिंदगी की ये जंग खत्म कर सकती है. या फिर उसे सचमुच ज़िंदगी बख़्श सकती है. लेकिन जैसे-जैसे तारीख करीब आती जा रही है, शहज़ादी की जिंदगी और जान बख्शे जाने की उम्मीद दम तोड़ती जा रही है.
हर बार शहजादी को मिला धोखा अगर शहजादी की जिंदगी और उम्मीद दोनों सचमुच दम तोड़ जाती है, तो ये शहजादी के साथ सबसे बड़ी नाइंसाफी होगी. मुहब्बत में धोखा खाई, धोखे से अबू धाबी ले जाई गई, अबू धाबी में इलाज के नाम पर धोखा खाया, धोखे के हाथों बेची गई, धोखे में घर की नौकरानी बनी और फिर उसी धोखे और फरेब ने उसे क़ातिल बना दिया. अब ऐसे में इतने सारे धोखों के बीच अगर बेकसूर और बेगुनाह शहजादी को गोली मार कर मौत की सजा दी जाती है, तो ये कैसा और कहां का इंसाफ होगा?
प्लास्टिक सर्जरी कराना चाहती थी शहजादी जी हां, ये यूपी के उसी बांदा जिले की शहजादी है, जो 19 दिसंबर 2021 को अबुधाबी भेजी गई थी. भेजी क्या, बेची गई थी. अपने ही प्रेमी उजैर के हाथों. तब शहजादी आठ साल की थी, जब किचन में खौलता हुआ पानी चूल्हे से उसके चेहरे पर गिर पड़ा था. चेहरा और शरीर का कुछ हिस्सा जल गया. लेकिन शहजादी ने हिम्मत नहीं हारी. इसके बाद भी अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी की, कॉलेज पास किया, गरीबों और बेसहारा लोगों की मदद के लिए रोटी बैंक नाम के एक एनजीओ से जुड़ गई. शहजादी का एक ही सपना था वो इतने पैसे कमा ले कि प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपने चेहरे को ठीक करा ले.
सोशल मीडिया पर उजैर से मुलाकात इसी कोशिश में लगी थी वो. तभी 2020 आया, कोरोना लाने वाला वही मनहूस साल. कोरोना ने सबको घरों में समेट कर रख दिया था. इसी सिमटी हुई दुनिया में मोबाइल के जरिए शहजादी की मुलाकात सोशल मीडिया पर आगरा के रहने वाले उजैर से हुई. उजैर ने शहजादी को उसके उस झुलसे हुए चेहरे के साथ अपनाने का वादा किया.
उजैर ने शहजादी को भेजा था अबू धाबी फिर साल 2021 आया, उजैर ने शहजादी को उसके चेहरे का इलाज करने के नाम पर उसे अबू धाबी जाने के राजी कर लिया. करीब 90 हजार और कुछ ज़ेवर लेकर शहजादी अबू धाबी पहुंच गई. अबू धाबी में उजैर ने उसे फूफा और फूफी के घर भेज दिया. फूफी नाजिया अबू धाबी की अल नाहयान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है. वहां जाने के बाद शहजादी को पहली बार उजैर और उसकी बेवफाई का अहसास हुआ.

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