
सनातन विवाद का असर! I.N.D.I.A की पहली रैली कैंसिल, उदयनिधि के बयान पर क्या बोले कमलनाथ और सुरजेवाला?
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एक तरफ जहां साल 2024 में विपक्षी गठबंधन बीजेपी के खिलाफ एक साथ, एक बैनर के तले आकर चुनाव लड़ने के कवायद में जुटा हुआ है, लेकिन उसके इस फैसले के हौसले बार-बार पस्त दिख रहे हैं. गठबंधन के सामने बार-बार यह सवाल उठ रहे हैं कि किसे पकड़े रहे हैं और किसे जाने दें. भोपाल में इंडिया गठबंधन की रैली रद्द हो गई है.
मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और पीसीसी चीफ कमलनाथ ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि भोपाल में इंडिया गठबंधन की रैली नहीं हो रही है. इसे रद्द कर दिया गया है. उन्होंने पत्रकारों के पूछने पर दो बार इस बात को दोहराया कि रैली को रद्द किया गया है. जानकारों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने रैली की तैयारी को लेकर असमर्थता जताई थी. इसके बाद रैली कैंसिल कर दी गई.
रैली हुई कैंसिल तो ये बोले सीएम शिवराज रैली कैंसिल होने पर सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश की लोगों के मन में रोष है. तकलीफ है. कांग्रेस को डर था कि वह रोष कहीं प्रकट न हो जाए. इसलिए गठबंधन की रैली ही कैंसल कर दी. जनता का आक्रोश I.N.D.I.A. गठबंधन और कांग्रेस के खिलाफ है.
इससे पहले मध्यप्रदेश चुनाव प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया के सवाल पर कहा कि हमारी बात चल रही है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बैठक है. उसके बाद रैली तय होगी, अभी कुछ भी फाइनल नहीं है.
क्या सच है डर जाने वाली बात? इन सारी बातों के सामने आने के बाद सवाल उठता है कि आखिर रैली क्यों टल गई? क्या शिवराज सिंह जो डरने वाली बात कह रहे हैं वह सच है? एक तरफ जहां साल 2024 में विपक्षी गठबंधन बीजेपी के खिलाफ एक साथ, एक बैनर के तले आकर चुनाव लड़ने के कवायद में जुटा हुआ है, लेकिन उसके इस फैसले के हौसले बार-बार पस्त दिख रहे हैं. गठबंधन के सामने बार-बार यह सवाल उठ रहे हैं कि किसे पकड़े रहे हैं और किसे जाने दें.
कांग्रेस के लिए पशोपेश की स्थिति मध्यप्रदेश के चुनावी माहौल में ऐसी ही स्थिति नजर आ रही है. लोकसभा से पहले यहां विधानसभा चुनाव का माहौल बना हुआ है. कांग्रेस और कमलनाथ इसके लिए बीते पांच साल से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के सामने पशोपेश की स्थिति है कि किस ओर बढ़ें और किस ओर नहीं. ऐसी ही स्थिति तब बन गई, जब अभी-अभी बने इंडि अलायंस ने भोपाल में पहली रैली प्रस्तावित की थी. तय था कि जल्द ही यह रैली की जाएगी. उधर उदयनिधि स्टालिन ने सनातन पर बयान दे दिया. अब कांग्रेस के लिए घिरने वाली स्थिति हो गई.
सनानत विवाद का कितना असर? असल में स्टालिन की पार्टी डीएमके भी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है. उदयनिधि स्टालिन के द्वारा जब सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताया गया तो सीधे कांग्रेस पर बात आ गई कि क्या कांग्रेस भी इसी मानसिकता से सनातन को देखती है. इस एक सवाल ने सारा माहौल बीजेपी के पक्ष में बनाना शुरू कर दिया लिहाजा कांग्रेस के लिए फिर वही स्थिति बन गई कि वह गठबंधन के बजाय पहले खुद की स्थिति सुधारे. कमलनाथ कई बार खुद को सनातनी और हनुमान भक्त बता चुके हैं. कई धार्मिक आयोजन भी करा चुके हैं, अब इंडिया गठबंधन की रैली होने से जाहिर है इन सारी मेहनत पर असर पड़ता. लिहाजा रैली कैंसिल होने की जानकारी कमलनाथ ने खुद ही दी है.

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