
‘वे हमें फिर से उपनिवेश बनाने की कोशिश कर रहे हैं’: ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला
The Wire
ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों का ज़िक्र करते हुए ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि युद्धों को सही ठहराने के लिए झूठ गढ़े जा रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हम ऐसे झूठ के दौर में नहीं रह सकते, जहां दुश्मन गढ़े जाते हैं और उनकी नकारात्मक छवि बनाकर तबाही को जायज़ ठहराया जाता है.' उन्होंने इराक युद्ध का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया, 'सद्दाम हुसैन के रासायनिक हथियार कहां हैं? किसे मिले?'
नई दिल्ली: कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में 21 मार्च को आयोजित ‘कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट्स’ के शिखर सम्मेलन में ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने वैश्विक राजनीति, युद्धों और असमानताओं पर तीखी टिप्पणी की.
उन्होंने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बीच एकजुटता और सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि दोनों महाद्वीपों के सामने भूख, जलवायु संकट और गलत सूचना जैसी साझा चुनौतियां हैं.
लूला ने अपने संबोधन में कहा, ‘लैटिन अमेरिका, कैरेबियन और अफ्रीका में 34 करोड़ लोग अब भी भूख का सामना कर रहे हैं. यह उस दुनिया में अस्वीकार्य है, जो सभी के लिए पर्याप्त भोजन पैदा करती है.’
उन्होंने जलवायु परिवर्तन को भी साझा संकट बताते हुए कहा, ‘हम ऐतिहासिक रूप से ग्लोबल वार्मिंग के जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन इसके सबसे गंभीर असर हम ही झेल रहे हैं.’
लूला ने आगे कहा कि अमेरिका जैसे देश किस तरह संसाधनों के दोहन की ताकत का इस्तेमाल करते हैं और अब उनकी नजर महत्वपूर्ण तथा दुर्लभ खनिजों पर है. ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये देश तबाही को जायज़ ठहराने के लिए झूठ बोल रहे हैं.
‘दुनिया में झूठ के आधार पर दुश्मन बनाए जा रहे’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर ईरान के साथ युद्ध को लेकर अलग-अलग रुख पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ब्रिटेन सबसे मजबूत रिश्तों में से एक था. यह देखकर दुख होता है कि यह रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा.

अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है. विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से ‘मित्र’ रहे ईरान पर थोपे गए युद्ध को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ ‘विश्वासघात’ है.







