
ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमले का 22वां दिन: अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी, मौतों का आंकड़ा 1,300 पार
The Wire
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़रायल हमलों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका अतिरिक्त सैन्य बल भेज रहा है, जबकि ट्रंप ‘ऑपरेशन खत्म’ करने की बात भी कर रहे हैं. ईरान-लेबनान में भारी जनहानि हुई है और लाखों लोग विस्थापित हैं. संघर्ष का असर भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिका और इज़रायल की ओर से ईरान पर तीन हफ्तों से जारी हवाई हमलों के बीच अब अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ाने का फैसला किया है. अमेरिकी सेना तीन और युद्धपोत तथा करीब 2,500 अतिरिक्त मरीन तैनात कर रही है.
इसी बीच पेंटागन ने इस युद्ध के लिए अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मांग की है, जिसके लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी. यह मांग ऐसे समय आई है जब अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज रिकॉर्ड 39 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है.
हालांकि, इन सैन्य कदमों के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनका प्रशासन क्षेत्र में सैन्य अभियानों को ‘धीरे-धीरे समाप्त करने’ पर विचार कर रहा है. ट्रंप का यह बयान उनकी सरकार के हालिया सैन्य विस्तार के फैसलों से अलग नजर आता है.
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ट्रंप के अनुरोध पर इज़रायल ईरान के उस गैस फील्ड पर हमले रोक देगा, जिस पर वहां की बिजली आपूर्ति का बड़ा हिस्सा निर्भर है. इससे पहले इज़रायल के इस हमले के जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के अन्य देशों में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना तेज कर दिया था.
जंग के मानवीय असर भी लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. ईरान में अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में यह आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच गया है. इज़रायल में 15 और क्षेत्र में तैनात 13 अमेरिकी सैनिकों की भी जान गई है. लेबनान और ईरान में लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं.
इस संघर्ष का असर भारत तक भी महसूस किया जा रहा है. गुजरात के सूरत में कपड़ा उद्योग से जुड़े मजदूर गैस की कमी के चलते काम बंद होने के कारण अपने-अपने घर लौट रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान से जुड़े आपूर्ति संकट के कारण एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हुई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर ईरान के साथ युद्ध को लेकर अलग-अलग रुख पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ब्रिटेन सबसे मजबूत रिश्तों में से एक था. यह देखकर दुख होता है कि यह रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा.

अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है. विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से ‘मित्र’ रहे ईरान पर थोपे गए युद्ध को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ ‘विश्वासघात’ है.



