
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने में मदद की
The Wire
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की हालिया वार्षिक थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते साल भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने में मदद की थी. इससे पहले ट्रंप ने इस दावे 70 से अधिक बार दोहराया है कि उन्होंने 10 मई को 200% टैरिफ लगाने की धमकी देकर दोनों देशों के बीच युद्धविराम करवाया और संभावित परमाणु युद्ध को टाल दिया था.
नई दिल्ली: अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी की ताज़ा वार्षिक खतरा आकलन (थ्रेट असेसमेंट) रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने में मदद की थी, और फिलहाल दोनों देशों की तरफ से फिर से खुले संघर्ष में लौटने की कोई मंशा नहीं दिखाई गई है.
हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि उग्रवादी हमलों के चलते क्षेत्र अचानक किसी संकट की चपेट में आ सकता है.
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय (ओडीएनआई) ने 18 मार्च को जारी अपनी 2026 की वार्षिक खतरा आकलन (एटीए) रिपोर्ट में कहा है कि दक्षिण एशिया अमेरिका के लिए अब भी ‘स्थायी सुरक्षा चुनौतियां’ पेश करता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में दो परमाणु-संपन्न पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम लगातार बना रहता है. इसमें यह भी रेखांकित किया गया है कि पिछले टकराव दिखाते हैं कि बड़ी संख्या में जान-माल के नुकसान वाली घटनाओं के बाद हालात कितनी तेजी से बिगड़ सकते हैं.
रिपोर्ट में पहलगाम के पास हुए आतंकी हमले का उल्लेख किया गया है, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी. इसे इस बात का उदाहरण बताया गया है कि किस तरह आतंकवादी हमले दो परमाणु-संपन्न देशों के बीच संघर्ष को भड़का सकते हैं, जो स्वतंत्रता के बाद कई बार युद्ध लड़ चुके हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप ने हालिया परमाणु तनाव को कम किया, और हमारा आकलन है कि दोनों देशों में से कोई भी खुले संघर्ष में लौटना नहीं चाहता. हालांकि, ऐसे हालात बने हुए हैं जिनका फायदा उठाकर आतंकी तत्व संकट पैदा कर सकते हैं.’

अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है. विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से ‘मित्र’ रहे ईरान पर थोपे गए युद्ध को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ ‘विश्वासघात’ है.


