
ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमले का 24वां दिन: ट्रंप की ‘पावर प्लांट तबाह’ करने की धमकी, भारत में पीएनजी पर ज़ोर
The Wire
ईरान पर अमेरिकी-इज़रायली हमलों के बाद शुरू हुआ युद्ध चौथे हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) पर बढ़े तनाव के बीच भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है और सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर ज़ोर दे रही है.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इसके असर अब भारत तक महसूस किए जा रहे हैं. एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच वैश्विक तनाव और गहरा गया है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि यदि उसने 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स ‘तबाह’ कर देगा. इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि किसी भी हमले का जवाब वह अमेरिकी और इजरायली ऊर्जा एवं बुनियादी ढांचे पर हमलों से देगा.
अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए इस युद्ध में अब तक भारी जनहानि हुई है. ईरान में 1,500 से अधिक, लेबनान में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इज़रायल में 15 और अमेरिका के 13 सैन्यकर्मी भी मारे गए हैं. खाड़ी क्षेत्र में भी नागरिक हताहत हुए हैं, जबकि ईरान और लेबनान में लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं.
भारत में असर: ‘पीएनजी अपनाएं’ का सरकारी सुझाव
भारत में एलपीजी संकट की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की मांग का आकलन करने और इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने को कहा है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी दफ्तरों, आवासीय परिसरों और कैंटीनों को पीएनजी अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जबकि सिटी गैस वितरण कंपनियों को नेटवर्क विस्तार के लिए समर्थन दिया जा रहा है.
मोदी ने की सुरक्षा मामलों की बैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर ईरान के साथ युद्ध को लेकर अलग-अलग रुख पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ब्रिटेन सबसे मजबूत रिश्तों में से एक था. यह देखकर दुख होता है कि यह रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा.

अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है. विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से ‘मित्र’ रहे ईरान पर थोपे गए युद्ध को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ ‘विश्वासघात’ है.





