
‘…ताकि वे युद्ध से मुनाफा कमा सकें’: जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे युवा
The Wire
जर्मनी की राजधानी बर्लिन समेत देश के 130 से अधिक शहरों में युवाओं ने सरकार की अनिवार्य सैन्य सेवा दोबारा लागू करने की योजना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवाओं को युद्ध के लिए तैयार करना ग़लत है और सेना में भर्ती केवल स्वेच्छा से होनी चाहिए, न कि किसी दबाव में.
नई दिल्ली: जर्मनी की राजधानी बर्लिन में गुरुवार (5 मार्च) को बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए. सेंट्रल पोट्सडामर प्लात्स से शुरू हुआ यह मार्च सरकार की उस योजना के विरोध में था, जिसके तहत अनिवार्य सैन्य सेवा को दोबारा लागू करने की तैयारी की जा रही है. प्रदर्शनकारी शहर के अलग-अलग हिस्सों से गुजरते हुए सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते रहे.
पुलिस के अनुसार बर्लिन में इस प्रदर्शन में करीब 3,000 लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों का दावा है कि राजधानी में करीब 6,000 लोग जुटे थे. उनका कहना है कि जर्मनी के 130 से अधिक शहरों और कस्बों में हुए इसी तरह के प्रदर्शनों में कुल लगभग 50,000 लोग शामिल हुए.
स्कूल स्ट्राइक कमेटी के प्रवक्ता 17 वर्षीय श्मुएल शात्स ने डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू) से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि युवाओं को युद्ध के लिए तैयार किया जा रहा है.
उनका कहना था, ‘मुझे नहीं लगता कि सबसे बुरे हालात में मैं अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के लिए मरने जा रहा हूं. अंत में लोगों को बड़ी कंपनियों, जैसे- राइनमेटाल या थिसेनक्रुप, के हितों के लिए खतरा उठाने भेज दिया जाएगा, ताकि वे युद्ध से मुनाफा कमा सकें.’
सरकार की नई सैन्य सेवा योजना
ज्ञात हो कि दिसंबर 2025 में जर्मन सरकार ने सैन्य सेवा से जुड़ा नया कानून पेश किया था. इसके तहत इस साल 18 वर्ष के सभी युवाओं को एक प्रश्नावली भेजी जाएगी, जिसमें उनसे सेना में शामिल होने की उनकी रुचि और उपयुक्तता के बारे में पूछा जाएगा. साथ ही उन्हें बुंडेसवेहर (जर्मन सेना) में स्वेच्छा से भर्ती होने की जानकारी भी दी जाएगी.
