
ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमले का 21वां दिन: गाज़ा नरसंहार मामले में जर्मनी ने इज़रायल से समर्थन वापस लिया
The Wire
अमेरिका और इज़रायल के हमलों से शुरू हुआ ईरान संघर्ष 21वें दिन और गंभीर हो गया है. जवाबी हमलों, ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और कुवैत तक फैले असर के बीच जर्मनी ने इज़रायल से दूरी बनाई है, जबकि अमेरिका युद्ध के लिए भारी अतिरिक्त फंड की तैयारी में है.
नई दिल्ली: अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष शुक्रवार, 20 मार्च को 21वें दिन में पहुंच गया. ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है, क्षेत्र में हालात और तनावपूर्ण बने हुए हैं.
ईरान ने कतर स्थित रास लाफ़ान गैस सुविधा पर हमला किया, जिसे इज़रायल द्वारा साउथ पार्स गैस फील्ड्स पर हमले के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. इस हमले के बाद ईरान की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) निर्यात क्षमता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
इस बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम में जर्मनी ने गाज़ा में कथित नरसंहार के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इज़रायल के समर्थन से खुद को अलग कर लिया है. यह बदलाव खास माना जा रहा है, क्योंकि 2023 में जब दक्षिण अफ्रीका ने यह मामला उठाया था, तब जर्मनी इज़रायल के पक्ष में खड़ा था.
उधर, इज़रायल ने शुक्रवार को ईरान की राजधानी तेहरान पर एक बार फिर हमले किए. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सुबह के समय तेहरान पर कई हवाई हमले किए गए. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इज़रायल से ईरान के प्राकृतिक गैस ढांचे पर दोबारा हमले न करने को कहा था.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को लेकर एक विवादास्पद बयान भी दिया है. उन्होंने ईरान पर अमेरिकी हमलों की तुलना 1941 में जापान द्वारा किए गए पर्ल हार्बर हमले से की. वॉशिंगटन में जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि युद्ध में ‘अचानक हमला’ अहम होता है. उन्होंने यह भी कहा, ‘सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन समझता है’
इस बीच अमेरिका का रक्षा विभाग (पेंटागन) ईरान के साथ चल रहे युद्ध के लिए अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मांग कर रहा है. यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस को भेजा गया है और इसे मंजूरी के लिए अमेरिकी कांग्रेस के पास जाना होगा. हालांकि, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस रकम की सीधे पुष्टि नहीं की, लेकिन इतना जरूर कहा कि ‘दुश्मनों को खत्म करने के लिए पैसे की जरूरत होती है’ और इसके लिए कांग्रेस से फंडिंग सुनिश्चित की जाएगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर ईरान के साथ युद्ध को लेकर अलग-अलग रुख पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ब्रिटेन सबसे मजबूत रिश्तों में से एक था. यह देखकर दुख होता है कि यह रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा.

अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है. विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से ‘मित्र’ रहे ईरान पर थोपे गए युद्ध को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ ‘विश्वासघात’ है.


