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ईरान पर हमलों को लेकर ब्रिक्स की साझा प्रतिक्रिया पर सहमति मुश्किल, कुछ सदस्य सीधे संघर्ष में शामिल: विदेश मंत्रालय

ईरान पर हमलों को लेकर ब्रिक्स की साझा प्रतिक्रिया पर सहमति मुश्किल, कुछ सदस्य सीधे संघर्ष में शामिल: विदेश मंत्रालय

The Wire
Sunday, March 15, 2026 10:51:35 AM UTC

ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों की निंदा को लेकर ब्रिक्स की संयुक्त प्रतिक्रिया पर सहमति बनाना मुश्किल हो गया है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, समूह के कुछ सदस्य देश पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में सीधे शामिल हैं. हालांकि, भारत ने कहा है कि वह ब्रिक्स देशों के साथ बातचीत जारी रखेगा.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईरान पर अमेरिका व इज़रायल के हमलों को लेकर ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिक्रिया तैयार करने के संबंध में शनिवार (14 मार्च) को भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘इस मुद्दे पर ब्रिक्स के भीतर सहमति बनाना कठिन हो गया है, क्योंकि समूह के कुछ सदस्य देश मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं.’

यह बयान ऐसे समय आया है जब दो दिन पहले ईरान ने भारत से अपील की थी कि वह ब्रिक्स की ओर से अमेरिका और इज़रायल के हमलों की निंदा करते हुए एक संयुक्त बयान जारी करने में पहल करे. 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा था कि यदि भारत ‘ईरान का मित्र’ है, तो ब्रिक्स को बढ़ते संघर्ष से निपटने में ‘मजबूत’ और ‘रचनात्मक’ भूमिका निभानी चाहिए.

इसके बाद शनिवार (14 मार्च) को विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा, ‘ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश पश्चिम एशिया क्षेत्र की मौजूदा स्थिति में सीधे तौर पर शामिल हैं, जिसका असर जारी संघर्ष पर ब्रिक्स की साझा स्थिति के लिए सहमति बनाने की प्रक्रिया पर पड़ा है. ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में भारत शेरपा चैनल के माध्यम से सदस्य देशों के बीच चर्चा को आगे बढ़ा रहा है.’

उन्होंने बताया कि ब्रिक्स शेरपा की पिछली वर्चुअल बैठक 12 मार्च को हुई थी. इसके अलावा भारत का नेतृत्व क्षेत्र के ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ भी बातचीत कर रहा है और यह संवाद आगे भी जारी रहेगा.

बता दें कि शेरपा चैनल, कूटनीति में वह आधिकारिक माध्यम होता है जिसके जरिए किसी शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि आपस में बातचीत करते हैं और सहमति बनाने की कोशिश करते हैं. सरल शब्दों में कहें तो हर देश एक ‘शेरपा’ नियुक्त करता है. यह व्यक्ति आमतौर पर प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का वरिष्ठ दूत/अधिकारी होता है. ये शेरपा नेताओं की बैठक से पहले एजेंडा, बयान, और समझौतों के मसौदे तैयार करने में भूमिका निभाते हैं. इन्हीं अधिकारियों के बीच होने वाली बातचीत को ‘शेरपा चैनल’ कहा जाता है.

पिछले साल से अलग है स्थिति

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