
यूएई को ईरान युद्ध की सबसे भारी क़ीमत क्यों चुकानी पड़ रही है?
BBC
ईरान ने अपने हमलों के फ़ोकस में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को रखा है. इसे सीधे तौर पर अमेरिका और इसराइल दोनों के लिए साफ़ संदेश क्यों माना जा रहा है?
अमेरिका-इसराइल और ईरान का युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर रहा है और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तेज़ी से ईरान के साफ़ निशाने के रूप में उभर रहा है.
ईरान की शुरुआती रणनीति केवल इसराइल का सामना करने पर फ़ोकस थी उसने अब इस रणनीति से शिफ़्ट करते हुए खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों पर हज़ारों ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं.
ईरान ने लड़ाई की शुरुआत में ही कह दिया था कि वो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा.
ईरान ने ख़ासतौर पर अपने हमले यूएई पर फ़ोकस करके अमेरिका और इसराइल को साफ़ संदेश दिया है क्योंकि दोनों ही देशों के यूएई से अच्छे संबंध हैं.
जब अमेरिका और इसराइल ने 28 फ़रवरी को ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया, तो तेहरान ने बिना देरी के जवाबी कार्रवाई सिर्फ़ इसराइल पर ही नहीं बल्कि अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों पर भी हमले किए.
बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, क़तर, ओमान और ख़ासकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को निशाना बनाया गया.
खाड़ी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों के साथ-साथ, ईरान ने नागरिक ढांचे पर भी हमला किया है, जिनमें हवाई अड्डे, होटल, रिहायशी इलाक़े और ख़ास तौर पर ऊर्जा ठिकाने शामिल हैं.













