
ईरान की मिसाइलें क्या यूरोप तक पहुंच सकती हैं?
BBC
ईरान ने हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया स्थित ब्रिटिश सॉवरेन बेस की ओर दो मिसाइलें दागी हैं. हालांकि, दोनों में से कोई भी मिसाइल बेस तक नहीं पहुंच पाई.
ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे की ओर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. ईरान की इस कार्रवाई को मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बढ़ने का संकेत माना जा रहा है.
हालांकि निशाने पर लिए गए ठिकानों पर हमला नहीं हो सका, लेकिन इसराइल डिफ़ेंस फोर्स का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार इस तरह की लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है.
ईरान ने अब तक आधिकारिक रूप से मिसाइल दागने की पुष्टि नहीं की है और ईरानी मीडिया ने अपनी रिपोर्टिंग में ज्यादातर विदेशी स्रोतों का हवाला दिया है.
विशेषज्ञ अब इस असफल हमले के प्रभावों का आकलन कर रहे हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि इसका संभावित लक्ष्यों के दायरे पर क्या असर पड़ सकता है.
क्या भविष्य में बर्लिन, पेरिस और लंदन जैसे यूरोप के शहर भी निशाने पर आ सकते हैं?
ब्रिटेन के एक कैबिनेट मंत्री ने कहा है आईडीएफ़ के इस दावे की पुष्टि करने के लिए "कोई ठोस आकलन नहीं है" कि ईरान के पास लंदन तक पहुंचने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें हैं.
ईरान ने अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता (रेंज) पर खुद एक सीमा तय कर रखी थी, हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि अब इसमें बदलाव हो चुका है.













