
धरी रह गई अमेरिकी सुरक्षा गारंटी, कैसे चकनाचूर हुआ दुबई जैसे शहरों का भ्रम
BBC
खाड़ी देशों में इवेंट लगातार रद्द हो रहे हैं. यहाँ हर दिन सिर्फ़ पर्यटन क्षेत्र में लगभग 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो रहा है. ये देश ईरान से नाराज़ हैं. साथ ही अमेरिका को लेकर भी यहाँ भारी ग़ुस्सा है.
पिछले कुछ दशकों में, जब लेबनान पर बम गिर रहे थे, इराक़ में आत्मघाती हमले हो रहे थे और सीरिया में इस्लामिक स्टेट विदेशियों को अग़वा कर उन्हें मौत के घाट उतार रहा था, तब दुबई में लगातार जश्न का माहौल बना हुआ था.
दुनिया के अमीर लोग दुबई के कृत्रिम द्वीपों पर हवेलियां ख़रीद रहे थे, अबू धाबी के लूव्र संग्रहालय में घूम रहे थे, या क़तर के रेगिस्तान में सफ़ारी का लुत्फ़ उठा रहे थे.
युद्ध, विरोध प्रदर्शनों और अस्थिरता से घिरे पड़ोस में, फ़ारस की खाड़ी के देशों ने सालों तक खुद को सुरक्षा और समृद्धि के गढ़ के तौर पर पेश किया है.
उनकी कोशिशों और फ़ायदेमंद टैक्स नीतियों ने अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आकर्षित किया. इसी वजह से दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे शहर अरबपतियों, लग्ज़री पर्यटन, और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए पसंदीदा ठिकाने बन गए.
लेकिन यह सब 28 फ़रवरी को बदल गया.
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उस दिन अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमले ने एक ऐसे युद्ध को जन्म दिया, जिसमें ईरान ने न सिर्फ़ इसराइली शहरों और इलाके में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर बमबारी करके जवाब दिया, बल्कि खाड़ी में अमेरिका के सहयोगियों को भी निशाना बनाया.













