
मोदी बहुत आक्रामक, PAK सेना के अधिकारी को सता रहा परमाणु हमले का डर
AajTak
पाकिस्तानी सेना से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल और नेशनल कमांड अथॉरिटी के सलाहकार खालिद अहमद किदवई ने भारत की नरेंद्र मोदी सरकार पर कट्टरपंथी होने का गंभीर आरोप लगाते हुए विवादित बयान दिया है.
पाकिस्तान की सेना से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल और पाकिस्तानी नेशनल कमांड अथॉरिटी के सलाहकार खालिद अहमद किदवई ने भारत की नरेंद्र मोदी सरकार को लेकर विवादित बयान दिया है. खालिद अहमद किदवई ने कहा कि भारत में न्यूक्लियर हथियार की ताकत अब हिंदू कट्टरपंथियों के हाथ में है, जिस वजह से क्षेत्र में सामरिक अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है.
सोमवार को साउथ एशिया में सामरिक स्थिरता पर एक वर्कशॉप में बात करते हुए किदवई ने कहा कि भारत में परमाणु शक्ति अब कट्टरपंथी लीडरशिप के हाथों में है. किदवई ने आगे कहा कि भारत में कट्टरपंथी विचारधारा वाली सरकार और परमाणु शक्ति का होना एक खतरनाक कॉम्बिनेशन है जो दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है.
किदवई ने आगे कहा कि भारत में परमाणु ताकत से संबंधित कमांड, कंट्रोल और ऑपरेशनल फैसलों की जिम्मेदार इंडियन नेशनल कमांड अथॉरिटी है. इसकी राजनीतिक परिषद की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो कार्य परिषद की कमान अजीत डोभाल के हाथों में है. इसके साथ ही भारत सरकार के कुछ मंत्री आरएसएस बैकग्राउंड से आते हैं जिनमें गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हैं.
जनसभाओं में परमाणु चलाने की बात करते हैं पीएम नरेंद्र मोदी किदवई ने आगे कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परमाणु इस्तेमाल को लेकर हमेशा आक्रमक रुख बनाए रखा है. अपनी जनसभाओं में वे परमाणु शक्ति के इस्तेमाल की बात करते हैं. वहीं उनके मंत्रियों ने भी कई मौकों पर भड़काऊ और गैर जिम्मेदार बयान दिए हैं.
पाकिस्तान सेना के पूर्व अधिकारी किदवई ने कहा कि फरवरी साल 2019 में बालाकोट में एयर स्ट्राइक और मार्च 2022 में मिसाइल गिरने की घटनाएं परमाणु सशक्त पड़ोसी देश के खिलाफ आक्रमण का उदाहरण हैं, जबकि इसका नुकसान उन्हें भी पता है.
किदवई ने अमेरिका और ब्रिटेन को भारत के साथ AUKUS डील जैसा कोई समझौता ना करने की चेतावनी भी दी. ऑकस डील के तहत यूएस और यूके, ऑस्ट्रेलिया को न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बियों को बनाने की टेक्नोलॉजी में मदद कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.










