
मेक अमेरिका हेल्दी अगेन... हेल्थकेयर संकट कितना गहरा, जो ट्रंप प्रशासन को नई डाइट गाइडलाइन लानी पड़ी?
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'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की तर्ज पर एक और नारा दिया गया है- मेक अमेरिका हेल्दी अगेन. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अब फ्लिप्ड फूड पिरामिड पर जोर दे रहा है, जिसमें प्रोटीन सबसे ऊपर होगा. अमेरिका को वाकई इस मुहिम की जरूरत भी है. हर तीन में एक एडल्ट ओवरवेट है, जबकि यहीं पर बड़ी आबादी खाने के लिए सूप किचन पर निर्भर है.
अमेरिका ने हाल में अपनी डाइटरी गाइडलाइन्स में बड़े बदलाव किए. ट्रंप प्रशासन ने इसमें प्रोटीन, डेयरी और कुछ खास तरह के फैट पर जोर दिया, जबकि चीनी और प्रोसेस्ड खाने पर कंट्रोल की बात की. अनाज तक को खाने की प्राथमिकता से हटा दिया गया है. माना जा रहा है कि बढ़ते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए ये फैसला लिया गया. दरअसल, अमेरिका में मोटापे सहित कई दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं. यहां तक कि इसका असर हेल्थकेयर सिस्टम पर पड़ा.
अपने ही सिस्टम से उठा भरोसा
वेस्ट हेल्थ और गैलप सेंटर ऑन हेल्थकेयर के सर्वे में निकलकर आया कि 47 फीसदी अमेरिकी अपने ही हेल्थकेयर में मेजर समस्याएं पाते हैं, जबकि 23 फीसदी लोग सोचते हैं कि सिस्टम गंभीर संकट में है. सर्वे में यह भी दिखा कि 29 फीसदी आबादी के लिए सबसे बड़ी समस्या इलाज करवाना है.
यूरोप, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में जहां इलाज को बुनियादी हक माना जाता है, वहीं अमेरिका में यह काफी हद तक लोगों की कमाई और बीमा पर निर्भर करता है. इलाज इतना महंगा है कि बीमा होने के बाद भी लोग डॉक्टर के पास जाने से डरते हैं. एंबुलेंस बुलाना, ओपीडी में जाना या क्रॉनिक बीमारी बड़ा खर्च मांगती है. यही वजह है कि लोग इलाज टालते हैं, जिससे बीमारी बढ़ती जाती है.
किस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं
मोटापा अब बेहद गंभीर और सिस्टम-लेवल की समस्या बन चुका. वहां करीब 40 फीसदी से ज़्यादा वयस्क मोटापे की श्रेणी में आते हैं. इसे पब्लिक हेल्थ क्राइसिस की तरह देखा जा रहा है. इसी के साथ कई और बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, मानसिक तनाव और कुछ तरह के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. नशे की समस्या यहां आम हो चुकी, जिसे ट्रंप नार्कोटेररिज्म भी बता रहे हैं.

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