
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उद्धव को राज ठाकरे के चैलेंज से कितना फर्क पड़ेगा?
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उद्धव ठाकरे फिर से अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के निशाने पर हैं. लगता है महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति के साथ साथ उनको महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से भी दो-दो हाथ करने पड़ेंगे - सवाल ये है कि एकनाथ शिंदे के राजनीतिक उभार के बाद क्या राज ठाकरे की राजनीतिक लाइन प्रासंगिक रह गई है?
उद्धव ठाकरे के खिलाफ राज ठाकरे अब ज्यादा खुल कर सामने आ गये हैं. राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता नये सिरे से सड़क पर उत्पात मचाने लगे हैं - और ध्यान देने वाली बात ये है कि एमएनएस कार्यकर्ताओं को राज ठाकरे का खुला सपोर्ट भी मिल रहा है.
ठाणे में उद्धव ठाकरे के काफिले पर हुए हमले को बीड की घटना का रिएक्शन बताकर राज ठाकरे ने संकेत तो ऐसा ही दिया है. बीड में राज ठाकरे के काफिले पर कुछ लोगों ने सुपारी फेंकी थी, जिसका आरोप में शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ताओं पर लगा है.
अपने समर्थकों को संबोधित सोशल मीडिया पोस्ट में राज ठाकरे ने खुलेआम ऐलान कर दिया है कि अगर कोई उन पर उंगली उठाएगा तो उनके एमएनएस कार्यकर्ता डबल डोज देंगे - और ये सब तब हो रहा है जब वो महाराष्ट्र की 200-235 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं. ये थोड़ा अजीब भी लगता है क्योंकि कुछ दिन पहले हुए लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन महायुति को बिना शर्त समर्धन दिया था.
और सिर्फ उद्धव ठाकरे ही नहीं, राज ठाकरे उनके साथ साथ शरद पवार को भी निशाना बना रहे हैं. राज ठाकरे का सीधा आरोप है कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार मिलकर मराठवाड़ा क्षेत्र में दंगे भड़काने के लिए मराठा आंदोलन का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं. छत्रपति संभाजीनगर में एक प्रेस कांफ्रेंस में राज ठाकरे ने दावा किया कि मनोज जरांगे के नेतृत्व वाले आरक्षण आंदोलन को उद्धव ठाकरे और शरद पवार जातीय राजनीति के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
उद्धव ठाकरे को राज ठाकरे की चेतावनी
उद्धव ठाकरे जब महाविकास आघाड़ी सरकार में मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब भी राज ठाकरे खासे एक्टिव नजर आये थे. मुंबई में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर के खिलाफ अभियान चलाने से लेकर अयोध्या दौरे तक, राज ठाकरे तरह तरह से उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व एजेंडे को चुनौती देते रहते थे. राज ठाकरे की भाषा और सियासी शैली बिलकुल बीजेपी की लाइन से मेल खाती नजर आ रही थी, लेकिन बाद में वो शांत हो गये और अयोध्या दौरा भी स्थगित कर दिया. शायद बीजेपी की तरफ से मिल रह सपोर्ट की वैलिडिटी खत्म हो गई थी, क्योंकि बीजेपी ने राज ठाकरे का विकल्प तब तक खोज लिया था.

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