
'ममता की पार्टी नहीं, CPM से है हमारी टक्कर', त्रिपुरा के CM से आजतक की खास बातचीत
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त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री डॉक्टर माणिक साहा ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कहा है कि उनकी टक्कर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी नहीं, सीपीएम से है.
त्रिपुरा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में करीब 10 महीने का ही समय बचा है, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मुख्यमंत्री बदल दिया है. बिप्लब कुमार देब को सीएम पद से हटाकर डॉक्टर माणिक साहा की ताजपोशी बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने कर दी है. डॉक्टर माणिक साहा के सामने सबसे बड़ी चुनौती त्रिपुरा चुनाव में पार्टी को चुनाव जीताकर फिर से सत्ता में लाने की है.
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता अभिषेक बनर्जी लगातार त्रिपुरा के दौरे कर रहे हैं. अभिषेक बनर्जी त्रिपुरा को टीएमसी का गढ़ बनाने का दावा कर रहे हैं. दूसरी तरफ त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री डॉक्टर माणिक साहा ने कहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी नहीं, हमारी टक्कर सीपीएम से है. मुख्यमंत्री बनाए गए त्रिपुरा बीजेपी के अध्यक्ष माणिक साहा ने आजतक कहा कि बिप्लब देब ने बीजेपी को राज्य में खड़ा किया.
उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन को केंद्रीय नेतृत्व का निर्णय बताया और बिप्लब कुमार देब की तारीफ की. माणिक साहा ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में बिप्लब कुमार देब फेल तो नहीं हैं. बिप्लब कुमार देब के नेतृत्व में हम सबने काम किया है. वे एक्टिव रहते हैं. त्रिपुरा बीजेपी में लीडरशिप क्राइसिस को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि एक के बाद एक नेता आ रहे हैं. विधानसभा चुनाव में चेहरा कौन होगा, इस सवाल पर माणिक साहा ने कहा कि इसका निर्णय तो केंद्रीय नेतृत्व ही लेगा.
#Exclusive त्रिपुरा के नए सीएम डॉ माणिक साहा ने की आजतक से खास बातचीत, विधानसभा चुनाव से पहले अगले कुछ महीनों के लिए अपनी रणनीति पर की बात #ReporterDiary #Tripura #politics| (@iindrojit) pic.twitter.com/Ry7Jwh3wOQ
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें एक दिन पहले तक ये नहीं पता था कि वे सीएम बनेंगे. पार्टी में पिछले पांच साल से काम कर रहा था. जो भी चुनौतियां सामने आईं, उनका मुकाबला किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी जो चुनौतियां सामने आएंगी, उनका सामने करेंगे. डॉक्टर माणिक साहा ने कहा बीजेपी में किसे मुख्यमंत्री का चेहरा बनाना है, इसका निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही लेता है.
बिप्लब कुमार देब को मुख्यमंत्री पद से क्यों इस्तीफा देना पड़ा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई वजह नहीं थी. पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ये देखता है कि पार्टी को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है. किसको प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाए, किसे संगठन की. बीजेपी में हम सब लोग पद नहीं, संगठन के लिए काम करते हैं. माणिक साहा ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में गए नेताओं को ये संदेश दिया कि अब पार्टी में वापस आएं तो इसके बारे में पढ़कर आएं.

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