
मजबूत बिजनेस, टक्कर में कोई नहीं... इन 5 वजहों से गौतम अडानी की जोरदार वापसी, टॉप-20 की दहलीज पर पहुंचे
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अडानी ग्रुप (Adani Group) की ओर से निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कई प्रयास किए गए. जिसका असर भी हुआ. फरवरी के आखिरी हफ्ते से अडानी ग्रुप के शेयरों की चाल बदली, और अब लगातार कई दिनों से शेयरों में अपर सर्किट देखने को मिल रहे हैं.
अडानी ग्रुप के खिलाफ हिंडनबर्ग (Hindenburg) ने 106 पन्नों की रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका जवाब गौतम अडानी की कंपनी ने 413 पन्नों में दिया. लेकिन जब तक अडानी ग्रुप का जवाब आया, तब तक सेंटीमेंट बिगड़ चुका था. अडानी ग्रुप के सभी 10 कंपनियों के शेयर गिर नहीं, बल्कि बिखर रहे थे. निवेशकों में हाहाकार मच गया कि आखिर हिंडनबर्ग को ऐसा क्या हाथ लग गया जिसने अडानी के साम्राज्य को हिला दिया.
दरअसल, 24 जनवरी को हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट पब्लिश की थी, उसके बाद से लगातार कई दिनों तक अडानी ग्रुप के शेयरों में लोअर सर्किट लगे. निवेशकों के पैसे डूबते जा रहे थे. उधर हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि अडानी ग्रुप के शेयर 85% तक ओवरवैल्यूड हैं. जनवरी के आखिरी हफ्ते से जो अडानी ग्रुप के कंपनियों में गिरावट शुरू हुई, वो फरवरी के आखिर तक जारी रही. इस दौरान कुछ कंपनियों के शेयर तो 85 फीसदी तक गिर गए.
हालांकि इस दौरान अडानी ग्रुप (Adani Group) की ओर से निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कई प्रयास किए गए. जिसका असर भी हुआ. फरवरी के आखिरी हफ्ते से अडानी ग्रुप के शेयरों की चाल बदली, और अब लगातार कई दिनों से शेयरों में अपर सर्किट देखने को मिल रहे हैं. खासकर अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी ट्रांसमिशन और अडानी टोटल गैस के शेयरों में अभी भी अपर सर्किट का सिलसिला जारी है.
अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी से गौतम अडानी की नेटवर्थ में भारी सुधार हुआ है. लगातार गिरावट की वजह से गौतम अडानी ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) में फिसलकर 34वें पायदान पर पहुंच गए थे, लेकिन पिछले करीब 10 दिनों में सुधार के बाद अब वो एक बार फिर 21वें पायदान पर आ गए हैं. शुक्रवार को अडानी ग्रुप के अडानी ट्रांसमिशन, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी टोटल गैस के शेयरों में अपर सर्किट लगे. जिस तरह से अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी है, उसे देखते हुए लग रहा है कि जल्द ही अडानी टॉप-20 अमीरों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे. अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी के पीछे ये 5 बड़े फैक्टर्स हैं.
1. मोनोपोली बिजनेस (Monopoly Business) हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद अडानी ग्रुप की सभी कंपनियों के शेयर गिर रहे थे, लेकिन एक समय के बाद ये लगने लगा कि अब तो गिरने की कोई वजह नहीं रह गई है. क्योंकि कुछ कंपनियों का बिजनेस बेहद मजबूत है. खासकर अडानी पोर्ट्स, अडानी विल्मर और अडानी ग्रीन एनर्जी का बिजनेस दमदार है. साथ ही असेट्स भी काफी हैं. भारत में 25 फीसदी से ज्यादा Ports Business अडानी ग्रुप के पास है, इस सेक्टर में कंपनी की अपनी मोनोपोली है. इस अलावा ग्रीन एनर्जी सेक्टर यहां भी दूसरी कंपनियां एंट्री की जगह खोज रही हैं.
अडानी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy) भी अपने सेक्टर में बड़ा प्लेयर है, 12 राज्यों में कारोबार फैला है. अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) भारत की सबसे बड़ी नवीकरणीय कंपनियों में से एक है, जिसके पोर्टफोलियो में फिलहाल 20,434 मेगावाट की परियोजनाएं हैं. इसके अलावा अडानी ग्रीन्स का ऑपरेटिंग रिन्यूएबल पोर्टफोलियो 8024 मेगावाट तक पहुंच चुका है, जो भारत में सबसे बड़ा है. ऐसे बिजनेस की वजह से निवेशकों का अडानी ग्रुप पर भरोसा लौटा है. और शेयर में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है.

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