
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले राजकीय दौरे पर जाएंगे अमेरिका, जानें क्या है खास
AajTak
नरेंद्र मोदी सरकार को केंद्र में काबिज हुए नो साल हो चुके हैं. पीएम मोदी इन 9 सालों में अब पहली ऑफिशियल विजिट पर अमेरिका जा रहे हैं. उनका ये दौरा कई मायनों में बेहद खास होने वाला है. क्योंकि ऑफिशियल विजिट मेजबान के आमंत्रण मिलने के बाद ही की जाती है. आइए आपको बताते हैं कि आधिकारिक यात्रा में क्या-क्या होता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीएम बनने के बाद यूं तो कई बार अमेरिका के दौरे पर जा चुके हैं, लेकिन अपने 9 साल के कार्यकाल में पहली बार पीएम मोदी ऑफिशियल स्टेट विजिट पर अमेरिका जा रहे हैं. उनका यह दौरा जून महीने में होगा. अमेरिका के राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस में उनकी मेजबानी यूएस प्रेसिडेंट जो बाइडेन करेंगे.
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव काराइन जीन-पियरे ने बताया , 'राष्ट्रपति जो बाइडेन और अमेरिका की फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन आधिकारिक राजकीय यात्रा पर आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करेंगे. पीएम की यात्रा के दौरान 22 जून को एक राजकीय रात्रिभोज भी दिया जाएगा.'
ऐसे तो पीएम मोदी अपने कार्यकाल के दौरान कई बार अमेरिका की यात्रा पर जा चुके हैं. लेकिन इनमें से कोई भी दौरा उनकी आधिकारिक स्टेट विजिट नहीं थी. राजनयिक प्रोटोकॉल के मामले में ऑफिशियल स्टेट विजिट को सबसे ऊपर रखा जाता है. भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में अमेरिका की आखिरी राजकीय यात्रा नवंबर 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की थी.
क्या होता है राजकीय दौरा?
राजकीय दौरे (स्टेट विजिट) में किसी देश का प्रमुख दूसरे देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राजशाही से जुड़े व्यक्ति को आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित करता है. राजकीय यात्रा की यही खासियत होती है कि उसमें जिस देश का दौरा किया जाना है, उसके प्रमुख को निमंत्रण भेजना होता है. इस तरह के दौरे में मेजबान अपने अतिथि का काफी सत्कार करता है. यात्रा में होने वाले सभी खर्चों का वहन भी मेजबान देश ही करता है.
दी जाती है 21 तोपों की सलामी

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.










