
पृथ्वी शॉ-उन्मुक्त चंद... धाकड़ हुई थी शुरुआत, कैसे गुमनामी में चले गए, क्या करते हैं आजकल दोनों
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उन्मुक्त चंद और पृथ्वी शॉ ने जिस तरह अपने करियर की शुरुआत की थी, वैसा कम ही क्रिकेटरों को नसीब होता है. दोनों की तुलना दिग्गज खिलाड़ियों से की जाने लगी, मगर समय के साथ-साथ दोनों का प्रदर्शन फीका होता चला गया.
कहानी... दो उन भारतीय क्रिकेटरों की, जिन्होंने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताया. फिर दिग्गज क्रिकेटर्स से उनकी तुलना की जाने लगी, मगर समय के साथ-साथ दोनों का प्रदर्शन फीका होता चला गया. एक ने तो भारतीय टीम के लिए इंटरनेशनल डेब्यू भी किया, लेकिन ज्यादा मैच खेल नहीं पाए. वहीं दूसरे को इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला, तो बाहरी देश का रुख किया.
बात हो रही है पृथ्वी शॉ और उन्मुक्त चंद की. एक समय था, जब इन दोनों खिलाड़ियों के नाम पर हजारों युवाओं ने क्रिकेटर बनने का सपना बुन लिया था. लेकिन जिन्हें वो आइडल मानने चले थे, वो एक तरह से गुमनामी में चले गए. क्रिकेट में केवल टैलेंट नहीं...अनुशासन, निरंतरता और मानसिक मजबूती भी मायने रखता है. ये तीनों चीजें एक साथ शायद उन्मुक्त और पृथ्वी में देखने को नहीं मिली.
बात पहले उन्मुक्त चंद की करते हैं. जब साल 2012 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्मुक्त चंद ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खिताबी मुकाबले में नाबाद शतक (111*) जड़ा, तो ऐसा लगा जैसे टीम इंडिया को भविष्य का एक और बड़ा सितारा मिल गया हो. उन्हें टीम इंडिया का फ्यूचर कैप्टन कहा जाने लगा, लेकिन कप्तानी तो दूर वो सीनियर टीम में भी कभी जगह नहीं बना सके.
इसके पीछे की वजह उन्मुक्त चंद का घरेलू क्रिकेट में साधारण प्रदर्शन रहा. घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए उन्मुक्त आठ साल खेले और वो इस दौरान दिल्ली के कप्तान भी बने. फिर उन्होंने उत्तराखंड का रुख किया, जहां उनका प्रदर्शन एवरेज ही रहा. 67 फर्स्ट क्लास मैचों में उनका बैटिंग एवरेज 31.57 रहा, जो रेड-बॉल क्रिकेट के लिहाज से सही नहीं माना जा सकता. उन्मुक्त घरेलू क्रिकेट के अलावा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में भी कुछ खास नहीं कर पाए. आईपीएल में उन्मुक्त ने 21 मैच खेलकर 15 के एवरेज से सिर्फ 300 रन बनाए. उन्मुक्त ने आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स (DC), राजस्थान रॉयल्स (RR) और मुंबई इंडियंस (MI) का प्रतिनिधित्व किया.
चयनकर्ताओं की बेरुखी ने भी उन्मुक्त चंद के क्रिकेट करियर को पटरी से उतारने में अहम भूमिका निभाई. जब टीम इंडिया के लिए उन्मुक्त के दरवाजे पूरी तरह बंद हो गए, तो उन्होंने अगस्त 2021 में भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का रुख किया. 32 साल के उन्मुक्त को अब तक यूएसए के लिए अपना डेब्यू करने का मौका नहीं मिला है, लेकिन वो लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं.
चूंकि उन्मुक्त चंद का सपना अब अमेरिकी टीम में जगह बनाने का है. ऐसे में वो अब विकेटकीपिंग भी करने लगे हैं. उन्मुक्त फिलहाल मेजर लीग क्रिकेट (MLC) 2025 में लॉस एंजेलिस नाइट राइडर्स के लिए भाग ले रहे हैं. 22 जून 2025 को ही उन्मुक्त ने सिएटल ओर्कस के खिलाफ 58 गेंदों पर नाबाद 86 रनों की पारी खेलकर अपनी टीम को शानदार जीत दिलाई थी. उन्होंने इस इनिंग्स के जरिए दुनिया को दिखाया कि उनमें अब भी काफी क्रिकेट बचा है.

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