
बर्बादी का डर या फिर फजीहत की चिंता... आखिर पाकिस्तान के घुटनों पर आने की क्या है असली वजह
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टी20 वर्ल्ड कप विवाद के बीच पाकिस्तान ने भले ही बांग्लादेश के समर्थन की बातें की हों, लेकिन हकीकत में पीसीबी कभी भी टूर्नामेंट का बहिष्कार करने वाला नहीं था. यात्रा योजनाएं पहले से तय थीं और आईसीसी से रिश्ते खराब करने का जोखिम पाकिस्तान नहीं ले सकता था. त्रिपक्षीय समझौते और बड़े आर्थिक फायदे भी इसकी बड़ी वजह रहे.
टी20 वर्ल्ड कप को लेकर चल रहे विवाद में पाकिस्तान ने बांग्लादेश के प्रति एकजुटता दिखाने का सिर्फ नाटक किया. हकीकत में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की इसके पीछे अपनी सियासी चाल थी. पाकिस्तान ने केवल बांग्लादेश और भारतीय क्रिकेट बोर्ड के बीच टकराव को और बढ़ाने के लिए पूरा नाटक किया.
पाकिस्तान ने बांग्लादेश के मैचों की मेजबानी की पेशकश तक की और यहां तक कहा गया कि वे खुद भी टूर्नामेंट से हट सकते हैं. लेकिन अब जब बांग्लादेश ने साफ कर दिया है कि वह टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेगा, तो पाकिस्तान अपने वादे से पलट गया. ऐसे में सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान वाकई टी20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने वाला था? क्या वह बांग्लादेश के लिए अलग वेन्यू तैयार करने वाला था? अगर ऐसा है तो फिर वह पीछे क्यों हट गया.
पाकिस्तान पीछे हट गया
अगर रिपोर्ट्स पर भरोसा किया जाए, तो पाकिस्तान कभी भी श्रीलंका जाने की अपनी यात्रा टालने वाला नहीं था, जहां उसे टी20 वर्ल्ड कप के सभी मैच खेलने हैं. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पहले ही यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर चुका है और टीम 2 फरवरी की सुबह कोलंबो के लिए रवाना होने वाली है.
यह समझ में आता है कि पाकिस्तान ने बहिष्कार की बात को आधिकारिक रूप क्यों नहीं दिया, क्योंकि ऐसा करने पर उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता.
पीटीआई से बात करते हुए एक सूत्र ने 29 जनवरी को कहा, पीसीबी ने वर्ल्ड कप स्क्वॉड के लिए 2 फरवरी की सुबह कोलंबो रवाना होने की सभी यात्रा व्यवस्थाएं पहले ही कर ली हैं. क्रिकेट में, ठीक राजनीति की तरह, सबसे पहले खुद का हित देखा जाता है.

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