
दो धड़ों में बंटी दुनियाः रूस-नॉर्थ कोरिया चीन के साथ उतरे, जानिए ताइवान के पक्ष में कौन-कौन?
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चीन की धमकियों के बावजूद अमेरिकी नेता नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच गईं हैं. वो मंगलवार रात ताइवान की राजधानी ताइपे पहुंचीं. पेलोसी ने कहा कि अमेरिका ताइवान के साथ खड़ा है और वो उसकी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है. पेलोसी के ताइवान दौरे को लेकर चीन चिढ़ा हुआ है. चीन लगातार अंजाम भुगतने की धमकी दे रहा है. ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के आमने-सामने आने से दुनिया फिर से दो धड़ों में बंट गई है.
Nancy Pelosi Taiwan Visit: रूस-यूक्रेन में जंग से दुनिया पहले ही दो धड़ों में बंटी हुई थी और अब चीन-ताइवान के रिश्तों ने फिर से दुनिया को बांट दिया है. चीन की धमकी को दरकिनार कर अमेरिकी सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच गई हैं. चीन ने अमेरिका को 'आग से न खेलने' की धमकी दी थी.
नैंसी पेलोसी जैसे ही ताइवान की राजधानी की ताइपे पहुंचीं, वैसे ही मंगलवार रात को चीन ने अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स को तलब किया और फिर से धमकाया. चीन के उप विदेश मंत्री झाई शेंग ने धमकाते हुए कहा कि अमेरिका अपनी गलती की कीमत चुकाएगा. शेंग ने ये भी कहा कि अमेरिका को 'ताइवान कार्ड' खेलना बंद कर देना चाहिए और चीन के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए.
शेंग ने कहा कि पेलोसी ने ताइवान का दौरा कर 'वन चाइना पॉलिसी' का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि ये बहुत खतरनाक कदम है और इसके गंभीर नतीजे होंगे. चीन चुपचाप नहीं बैठेगा. हालांकि, अमेरिका का कहना है कि वन चाइना पॉलिसी पर उसका रुख साफ है. अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर जॉन किर्बी ने कहा कि वन चाइना पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं हुआ है और हम ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करते हैं.
ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन की तनातनी ने दुनिया को फिर से दो धड़ों में बांट दिया है. नॉर्थ कोरिया और रूस ने चीन का समर्थन किया है. वहीं, पेलोसी का कहना है कि अमेरिका ताइवान के साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है. अमेरिका ने ताइवान के साथ खड़े रहने का वादा किया था. पेलोसी ने ये भी कहा कि दुनिया को लोकतंत्र और निरंकुशता में से किसी एक को चुनना है.
चीन के समर्थन में कौन-कौन?
चीन के समर्थन में अब तक दो देश खुलकर सामने आ चुके हैं. इनमें एक उत्तर कोरिया है और दूसरा रूस. दोनों ही देशों ने पेलोसी के दौरे को गलत बताया है और उनके दौरे को उकसाने वाला कदम बताया है.

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