
तस्वीरों में देखें देपसांग और डेमचोक में कैसे हो रहा है डिसइंगेजमेंट, दोनों सेनाएं हटा रही हैं अस्थायी निर्माण
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चीन भले ही दुनियाभर में दादागीरी करे लेकिन उसे भारत के आगे झुकना ही पड़ा. LAC पर देपसांग और डैमचोक से चीन की सेना पीछे हटना शुरू हो चुकी है. सोमवार को जब ये समझौता हुआ था तब कई सवाल पूछे जा रहे थे जिन्हें लेकर अब तस्वीर साफ हो गई है.
भारत और चीन की सेनाएं शुक्रवार, 25 अक्टूबर से पूर्वी लद्दाख सीमा से पीछे हटना शुरू हो गई हैं. पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग पॉइंट में दोनों सेनाओं ने अपने अस्थायी टेंट और शेड हटा लिए हैं. गाड़ियां और मिलिट्री उपकरण भी पीछे ले जाए जा रहे हैं.
चीन के साथ नई गश्त व्यवस्था की घोषणा के बाद, आज तक के पास मौजूद सैटेलाइट तस्वीरों से साफ होता है कि देपसांग और डेमचोक में ग्राउंड डिसइंगेमेंट की प्रक्रिया शुरू हो गई है. शुक्रवार को ली गई ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में कई जगहों पर स्ट्रक्चर (अस्थायी निर्माण) में कमी देखी गई, जो सर्दियों से पहले हिमालय में लंबे समय से चल रहे गतिरोध के संभावित अंत की तरफ इशारा करती है.
हालांकि, क्षेत्र में अभी भी चीनी सेना के स्ट्रक्चर बने हुए हैं, जो दिखाते हैं कि गतिरोध के दौरान कैसे चीन ने वहां निर्माण कार्य किए थे. दोनों पक्षों को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी. शुक्रवार की तस्वीरें, जो अमेरिका स्थित मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा प्रदान की गई हैं, उनमें देखा जा सकता है कि हाल के दिनों में अस्थायी निर्माण ध्वस्त किए गए हैं.
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संभवतः डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया की सबसे बड़ी पुष्टि पैट्रोल पॉइंट 10 के पास देपसांग क्षेत्र की एक तस्वीर है, जहां गतिरोध के दौरान अस्थायी निर्माण बना लिए गए थे, उन्हें अब हटा दिया गया है. 7 अगस्त की इस जगह की तस्वीरों में एक बड़ा स्ट्रक्चर दिखाई दे रहा था, जबकि शुक्रवार की तस्वीरों में यह जगह समतल दिखाई दे रही थी.
दक्षिण में, डेमचोक के दूसरे इलाके में 9 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को ली गई तस्वीरों की तुलना से पता चलता है कि स्थायी निर्माण को हटा लिया गया है, जो कि डिसइंगेजमेंट की घोषणा के अनुरूप है.

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