
तमिलनाडु: सवर्णों के पैरों पर गिरे थे दलित वर्ग के लोग, 8 के खिलाफ केस
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मामला तमिलनाडु के विल्लुपुरम के ओट्टानाथल गांव का है. जहां 12 मई को दलित समुदाय के परिवारों ने अपने ग्राम देवता की पूजा पाठ के लिए एक समरोह की अनुमति ली थी. इस समारोह में कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए काफी भीड़ इकठ्ठा हो गयी.
तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में दलितों को सजा के तौर पर सवर्ण समुदाय के लोगों के पैरों पर गिराने का मामला सामने आया है. जानकारी के मुताबिक मामले की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और गांव के आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मामला तमिलनाडु के विल्लुपुरम के ओट्टानाथल गांव का है. जहां 12 मई को दलित समुदाय के परिवारों ने अपने ग्राम देवता की पूजा पाठ के लिए एक समरोह की अनुमति ली थी. इस समारोह में कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए काफी भीड़ इकठ्ठा हो गयी. जिसके बाद पुलिस को भी सूचना दी गयी. मौके पर पहुंचते ही पुलिस ने भीड़ को हटने का आदेश दिया. वहीं समारोह को आयोजित करने वालों को अपने साथ तिरुवेन्नईल्लूर पुलिस स्टेशन ले गयी. हालांकि वहां एक लिखित माफी और आश्वासन कि इस तरह की घटनाओं को दोहराया नहीं जाएगा, के बाद सभी को जाने दिया गया. हैरानी की बात यह है कि जब समूह वापस अपने गांव लौट रहा था, तो उन्हें गांव के सवर्णों द्वारा 14 मई को स्थानीय पंचायत में अदालत में उपस्थित होने के लिए आदेश दिया गया. जिसके बाद दलित समुदाय के कुछ सदस्य कंगारू कोर्ट में शामिल होने के लिए पहुंचे जहां उन्हें हिंदुओं के पैरों पर गिरने का आदेश दिया गया. ये सजा उन्हें समारोह को बिना हिंदुओं की अनुमति के आयोजन करने के लिए सुनाई गयी. कंगारू कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए थिरुमल, संथानम और अरुमुगम, सवर्ण समुदाय के सदस्यों के पैरों पर गिरे और माफी मांगी. इस मामले की तस्वीरें वायरल होने के बाद तमिल सिनेमा निर्देशक और दलित अधिकार कार्यकर्ता पीए रंजीत ने भी घटना के बारे में ट्वीट किया. शिकायत के बाद जिलाधिकारी व एसपी ने मौके पर पहुंचकर जांच की. गांव के 8 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने गोकुला कृष्णन और सीतारामन को गिरफ्तार किया है जबकि छह फरार हैं. आगे की जांच चल रही है. बता दें कि ओट्टानाथल एक गांव है जिसमें 200 वन्नियार जाति के परिवार और 30 दलित समुदाय के परिवार शामिल हैं.
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