
क्या अमेरिका के बिना नहीं चल पाएगा यूरोप... ग्रीनलैंड पर ट्रंप टैरिफ के बाद अब क्या होगा?
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यूरोप आज के समय में पूरी तरह से अमेरिका पर ही निर्भर है. खासकर जबसे रूस की एनर्जी और तेल पर प्रतिबंध लगे हैं, तबसे यूरोप अमेरिका पर और भी ज्यादा निर्भर हो चुका है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अपने सहयोगियों पर भी टैरिफ लगाने लगे हैं. ग्रीनलैंड को पाने की चाह में ट्रंप ने 8 यूरोप के देशों पर 10 फीसदी का टैरिफ लगा दिया है. ये देश नाटो का भी हिस्सा हैं. ट्रंप ने टैरिफ लगाने के साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका कई सालों से डेनमार्क समेत यूरोपीय संघ के सभी देशों की सुरक्षा करते आ रहा है, जिसके लिए उसने कुछ भी नहीं लिया. अब उनके लिए कर्ज चुकाने का टाइम आ गया है.
ट्रंप के इस बयान से एक सवाल उठता है कि ट्रंप इतने खुलकर यूरोप के कई देशों पर टैरिफ लगा दे रहे हैं और दूसरी ओर, यूरोपीय संघ कोई ठोस कदम नहीं उठाता है. क्या यूरोप सच में अमेरिका पूरी तरह से निर्भर है और अगर ये सच है तो क्यों? इसका जवाब ढूढंने पर कई तरह के फैक्ट्स मिले, जो कहीं न कही इस सवाल को सही साबित करते हैं कि यूरोप अमेरिका के बिना क्यों नहीं चल पाएगा?
सुरक्षा और नाटो
सुरक्षा और नाटो संगठन की रीढ़ अमेरिका ही है, क्योंकि नाटो की 70% से ज्यादा की सैन्य क्षमता अमेरिका देता है. साथ ही यूरोप की परमाणु सुरक्षा (Nuclear Deterrence) अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर ही टिकी हुई हैं. इसके अलावा, रूस जैसे देशों का मुकाबला करने के लिए मिसाइल डिफेंस, सैटेलाइट इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स अमेरिका के पास ही है. अगर अमेरिका यहां से हट जाए तो नाटो सिर्फ एक कागजी संगठन बनकर रह जाएगा.
हथियार और सैन्य टेक्नोलॉजी
यूरोप के पास टैंक, सैनिक क्षमता तो भरपूर है, लेकिन एयर डॉमिनेंस, ड्रोन वॉरफेयर, लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम और ग्लोबल मिलिट्री लॉजिस्टिक्स जैसी चीजों की कमी है और इसकी डिमांड अमेरिका ही पूरा करता आ रहा है. यह चीजें आधुनिक जरूरत हैं. यूक्रेन युद्ध में भी यूरोप अमेरिका पर ही निर्भर रहा है .

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