
कश्मीर से दिल्ली तक खतरे का संकेत... बर्फ बिना सूना हुआ हिमालय, बढ़ते तापमान ने बिगाड़ी तस्वीर
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रूस और चीन में रिकॉर्ड तोड़ बर्फ़बारी के बीच हिमालयी राज्यों में बर्फ़ की भारी कमी दर्ज की गई है. उत्तराखंड और हिमाचल में जनवरी के मध्य तक भी बर्फ़बारी नहीं होने से पर्यटन, पानी और खेती पर संकट गहरा गया है.
रूस में बर्फ़बारी ने 146 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. मॉस्को और पूर्वी रूस के केमचटका पेनिनसुला में बर्फ़बारी के चलते ज़िंदगी ठप पड़ गई है. कुछ ही दिनों में इतनी बर्फ़बारी हुई है, जितनी आमतौर पर महीनों में हुआ करती थी. उधर उत्तर-पूर्वी चीन में भी बर्फ़बारी ने ज़िंदगी की रफ़्तार पर रोक लगा दी है.
लेकिन अगर बात हिंदुस्तान की करें तो जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में जहां बर्फ़बारी लोगों को आकर्षित कर रही है, वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इस बार बर्फ़बारी लोगों को मायूस कर रही है. जनवरी के दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी उत्तराखंड में विंटर टूरिज़्म की राजधानी कहे जाने वाले औली बर्फ़बारी के लिए तरस गया है. वहीं पर्यटकों की पहली पसंद कहे जाने वाले नैनीताल में भी सूखा पसरा है.
पर्यटन पर असर और मौसम से उलट बुरांश के फूल
बर्फ़बारी न होने के चलते सैलानी न तो औली जा रहे हैं और न ही नैनीताल जाना पसंद कर रहे हैं. इतना ही नहीं, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मशहूर बुरांश के पेड़ों में अभी से फूलों की लाली दिखने लगी है. जो देखने में तो ख़ूबसूरत है, लेकिन वैज्ञानिक नज़रिए से यह शुभ संकेत नहीं है.
जनवरी में खिला बुरांश, बढ़ते तापमान की चेतावनी
बुरांश उत्तराखंड का राज्य पुष्प है और ऊँचाई व मौसम के आधार पर इसमें फूल खिलते हैं. आमतौर पर इनमें फूल फ़रवरी के अंत से खिलना शुरू होते हैं, जब तापमान बढ़ने लगता है. लेकिन जनवरी के महीने में ही बुरांश के पेड़ों में खिले हुए फूल इस बात की गवाही दे रहे हैं कि तापमान बढ़ रहा है. यानी बर्फ़बारी के मौसम में अगर इन पेड़ों में फूल खिलने लगें तो कहीं न कहीं यह एक चेतावनी है.

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