ट्रैक पर 51 घंटे बाद दौड़ी पहली ट्रेन, 182 शवों की शिनाख्त नहीं, CBI जांच की सिफारिश... ओडिशा हादसे के बाद अब कैसे हैं हालात
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कोरोमंडल एक्सप्रेस, बेंगलुरु हावड़ा एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी के एक साथ हादसे की चपेट में आने की ये घटना रेलवे के इतिहास में सामान्य घटना नहीं है. लिहाजा हर एक एंगल से पूरी घटना की पड़ताल चल रही है. अंतिम निष्कर्ष के लिए रेलवे सेफ्टी कमिश्नर की विस्तृत रिपोर्ट आने की बात हो रही है. साथ ही किसी तरह की साजिश का पता लगाने के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी गई है.
हादसे के दो दिन बाद भी ओडिशा के बालासोर में दर्द का मंजर नजर आ रहा है. यूं तो 51 घंटे बाद ट्रैक पर पहली ट्रेन दौड़ने लगी है, लेकिन अब भी बोगियां का मलबा त्रासदी की कहानी बता रहा है और इस कहानी में उलझे हैं कई सवाल. आखिर कैसे तीन ट्रेंने आपस में टकरा गईं? कैसे ये हादसा ढ़ाई सौ से अधिक लोगों की मौत और 1100 से अधिक लोगों के घायल होने की वजह बन गया? पड़ताल चल रही है.
दरअसल, कोरोमंडल एक्सप्रेस, बेंगलुरु हावड़ा एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी के एक साथ हादसे की चपेट में आने की ये घटना रेलवे के इतिहास में सामान्य घटना नहीं है. लिहाजा हर एक एंगल से पूरी घटना की पड़ताल चल रही है. अंतिम निष्कर्ष के लिए रेलवे सेफ्टी कमिश्नर की विस्तृत रिपोर्ट आने की बात हो रही है. साथ ही किसी तरह की साजिश का पता लगाने के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी गई है.
बता दें कि बालासोर में जहां ट्रेन हादसा हुआ है, वहां चौबीसों घंटे काम युद्धस्तर पर चल रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव लगातार घटनास्थल पर मौजूद हैं. सैकड़ों रेल कर्मी, राहत बचाव दल के जवान, टेक्नीशियन्स से लेकर इंजीनियर्स तक दिन रात काम कर रहे हैं. हादसे के बाद घटनास्थल पर जो हालात थे, वो तेजी से बदलते जा रहे हैं. पटरी पर बिखरी बोगियां अब हटाकर किनारे की जा चुकी हैं. हादसे के बाद दोनों एक्सप्रेस ट्रेन और मालगाड़ी के बचे हुए डिब्बे भी पटरी से हटाए जा चुके हैं. ट्रैक के रिस्टोरेशन का काम तेजी से चल रहा है. इसी का नतीजा है कि हादसे के 51 घंटे बाद ही पहली ट्रेन का संचालन इस ट्रैक पर शुरू किया गया.
275 लोगों की मौत, 182 शवों की शिनाख्त नहीं
शुक्रवार को बहनागा बाजार स्टेशन के पास हुए तबाही का मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप उठी. 275 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है. वहीं हजार से ज्यादा लोग घायल हैं. 182 शव ऐसे हैं, जिनकी अभी तक शिनाख्त नहीं हो सकी है. आलम ये है कि अस्पतालों के मुर्दाघर शवों से खचाखच भरे हैं और इस भीषण गर्मी में शवों को सुरक्षित रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. इसके लिए एक स्कूल और कोल्ड स्टोरेज को मुर्दाघर में तब्दील कर दिया गया है.

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